धनबाद(DHANBAD): गरीब के बेटा के "तोता रट" से आगे निकल कर विधायक जय राम महतो ने झारखंड में एक नई तरह की राजनीति शुरू कर दी है. उनके इस कदम से उनकी पार्टी को कितना फ़ायदा मिलेगा और प्रतिद्वंदी दलों को कितना नुकसान होगा ,यह तो आने वाला वक्त बताएगा ,लेकिन इसकी चर्चा खूब हो रही है. झारखंड के चर्चित विधायक जयराम महतो लीक से हटकर राजनीति करने वालों में अपनी पहचान बना ली है. झारखंड में राजनीतिक दल ओबीसी, एस टी - एससी, अल्पसंख्यक वर्गों के नाम पर अलग-अलग मोर्चा का गठन कर राजनीति करते है. इसमें प्रमुख सभी प्रमुख दल शामिल हैं, लेकिन भाजपा, कांग्रेस और झामुमो की राजनीति से अलग हटकर जयराम महतो ने एक नई पहल शुरू की है.
लीक से हटकर क्या अब शुरू होगी राजनीति
जयराम महतो ने सवर्ण मोर्चा का गठन कर एक अलग राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. यह अलग बात है कि झारखंड में सभी दलों की राजनीति ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिला को लेकर चल रही है. लगभग सभी दलों में सवर्ण हाशिये पर हैं. ऐसे में जयराम महतो ने इस नाराजगी को समेटने का बड़ा प्रयास किया है. वैसे भी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को मैदान में उतार कर सबको चौंका दिया था. यह अलग बात है कि पार्टी को सिर्फ एक ही सीट मिली, लेकिन विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी जेएलकेएम ने एक जमीन तैयार कर ली.
झारखंड में चल रही गठबंधन की सरकार
जयराम महतो की राजनीति से उनकी ही बिरादरी के कई लोगों की राजनीति धुमिल पड़ गए. विशेषकर युवाओं जयराम महतो का बड़ा क्रेज है.
झारखंड में अभी गठबंधन की सरकार चल रही है. गठबंधन के पास फिलहाल 56 विधायक हैं तो एनडीए के पास 24 विधायक हैं. जेएलकेएम के पास एक विधायक हिन्। वैसे भी जयराम महतो डुमरी से निकलकर बाहर की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं. पार्टी नेतृत्व ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियो को संगठन की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने, संगठन को मजबूत बनाने तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया है.
