धनबाद (DHANBAD): कभी बाढ़ की विभीषिका के लिए कुख्यात दामोदर नदी आज की तारीख में जीवन की भीख मांग रही है. उद्योगों के अपशिष्ट तत्व और अवैध कोयला खनन इसकी अस्तित्व को मिटाने पर तुले हुए है. दामोदर नदी का अस्तित्व अगर मिट गया, तो झारखंड में हाहाकार मच जाएगा. फिर भी इस पर जितनी कड़ी निगाह होनी चाहिए, सरकार नहीं रखती है. यह नदी झारखंड के लातेहार से निकलती है. इसकी कुल लंबाई 592 किलोमीटर है. यह झारखंड और पश्चिम बंगाल होकर बहती है और फिर हुगली नदी में मिल जाती है. दामोदर नदी की सहायक कंपनियों में बराकर, कोनार, जमुनिया, कतरी नदी जानी जाती है. इस नदी से मैथन डैम, पंचेत डैम, कोनार डैम तथा दामोदर वैली कॉरपोरेशन से संचालित कई जलाशय और बिजली परियोजनाएं चलती है.
झारखंड के लातेहार से निकलती है यह नदी
जानकारी के अनुसार लातेहार से निकलकर यह नदी रामगढ़, बोकारो, धनबाद और पश्चिम बंगाल के आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र से होते हुए हुगली नदी में जाकर मिल जाती है. इस नदी के अगल-बगल शहर भी बसे हुए हैं. कोयलांचल में तो पानी का प्रमुख स्रोत दामोदर नदी ही है. जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने नदी में बढ़ते प्रदूषण और अवैध खनन पर गंभीर चिंता व्यक्त की हैं. उन्होंने कहा है कि धनबाद और बोकारो क्षेत्र की नदियों का अस्तित्व संकट में है. उनका कहना है कि अवैध खनन अब दामोदर नदी तक पहुंच गया है और कई स्थानों पर नदी के भीतर से तथा किनारे से कोयला निकाला जा रहा है.
नदी की प्राकृतिक धारा भी प्रभावित हो गई है
नदी की प्राकृतिक धारा भी प्रभावित हो रही है. उन्होंने जमुनिया, कतरी और गर्गा नदी की स्थिति को भी चिंताजनक बताया है. दामोदर नदी के अगल-बगल स्थापित उद्योगों के अपशिष्ट को नदी में यूं ही बहाने पर रोक लगाने की कई बार मांग की गई. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं, विधायक सरयू राय ने कहा है कि थर्मल पावर संयंत्रों से निकलने वाली राख का सुरक्षित निस्तारण करना प्रबंधन की जिम्मेवारी है. उन्होंने कहा है कि पाइपलाइन फटने की वजह से बार-बार राख नदियों में पहुंच रही है. इस नदी को खतरा है.
एसटीपी और अन्य पर्यावरण मानकों का पालन नहीं
कई स्थानों पर एसटीपी और अन्य पर्यावरण मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. अवैध कोयला खनन को लेकर उन्होंने प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल खड़े किये. शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे अवैध कारोबारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है. बता दे कि दामोदर नदी पूर्वी भारत के प्रमुख नदियों में से एक है. यह झारखंड के प्रमुख नदी में से एक है. इसे कभी-कभी बंगाल का "शोक" भी कहा जाता था. पहले इसमें आने वाले पानी से भारी तबाही होती थी.
