Jharkhand

एक अनार, सौ बीमार...एक ज़मीन पर तीन पक्ष ने ठोका दावा, धनबाद में गहराया करोड़ों की जमीन पर विवाद 

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer
एक अनार, सौ बीमार...एक ज़मीन पर तीन पक्ष ने ठोका दावा, धनबाद में गहराया करोड़ों की जमीन पर विवाद 

धनबाद (DHANBAD):एक कहावत आप लोगों ने सुनी होगी, 'एक अनार, सौ बीमार'.दरअसल, कोयलांचल धनबाद में यह मुहावरा सच होता हुआ दिखाई दे रहा है, जहां धनबाद के भूली पंचवटी नगर में करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. काली मंदिर के पास स्थित इस जमीन पर बीसीसीएल, स्थानीय ग्रामीण और शुभम वर्मा अपना-अपना दावा कर रहे है.पिछले 15 दिनों से यहां नींव की खुदाई, प्लॉटिंग और घेराबंदी का काम चल रहा था.मामले की जानकारी मिलने के बाद अब भूली टाउनशिप एडमिनिस्ट्रेशन (बीटीए) ने कार्रवाई शुरू कर दी है.

एलआरडीसी और सीओ को आवेदन देकर पूरे मामले में कार्रवाई की मांग

बीटीए के एचआर मैनेजर नीरज कुमार, राजस्व निरीक्षक परशुराम चौहान और सहायक राजस्व निरीक्षक अशरफ हुसैन मौके पर पहुंचे और निर्माणाधीन बाउंड्री वॉल को ध्वस्त कर दिया.इस मामले में बीटीए की ओर से भूली ओपी में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई है. बीटीए अधिकारियों के अनुसार, सीओ के निर्देश पर जमीन की मापी कराई गई थी और जमीन की सीमा को चूना डालकर चिन्हित किया गया था. इसके बावजूद वहां अवैध निर्माण और घेराबंदी का काम जारी था.वहीं, स्थानीय ग्रामीणों ने भी एलआरडीसी और सीओ को आवेदन देकर पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की है.

नकली दस्तावेजों के सहारे बेचने की कोशिश

ग्रामीणों का आरोप है कि मौजा नंबर-1, खाता नंबर-109 और प्लॉट नंबर-2675 की करीब 45 डिसमिल जमीन को फर्जी खतियान और नकली दस्तावेजों के सहारे बेचने की कोशिश की जा रही है. ग्रामीण सरोजा देवी का कहना है कि वह करीब 30 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रही हैं और यह जमीन लंबे समय से रास्ते और बच्चों के खेल मैदान के रूप में इस्तेमाल होती रही है.ग्रामीणों ने प्रशासन से भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.वहीं, जमीन पर घेराबंदी कर रहे शुभम वर्मा ने सभी आरोपों को गलत बताया है.उनका कहना है कि यह जमीन उनके परिवार ने करीब 30 वर्ष पहले खरीदी थी और उनके पास इसके सभी दस्तावेज मौजूद है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बेवजह विवाद खड़ा कर रहे है.

प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी

बताया जा रहा है कि इस जमीन पर नगर निगम और वन विभाग की ओर से बड़ी संख्या में पौधारोपण भी किया गया था, जिसे धीरे-धीरे हटा दिया गया.अब पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी है.देखने वाली बात होगी कि दस्तावेजों की जांच के बाद इस जमीन का असली हकदार कौन साबित होता है.

रिपोर्ट-नीरज कुमार