Jharkhand

बड़ा सवाल : कतरास के छाताबाद में कितनी धंसान की घटनाएं होंगीं ? फिर गोफ में समा गया तालाब

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

 धनबाद(DHANBAD): कतरास के छाताबाद  के अस्तित्व पर बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है.  7 अगस्त को दर्जनों घर ध्वस्त होने के बाद 26 अगस्त की रात फिर इलाके में धंसान  की बड़ी घटना हुई है.  इस घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर आबादी रहती है.   उल्लेखनीय है कि 7 अगस्त को हुई घटना के बाद "आशियाना बचाओ आंदोलन" के खत्म होने के मात्र कुछ ही घंटे बाद काजूबगान हदहदिया  के पास जमीन फटने से बड़े आकार का गोफ  बन गया.  गोफ  में बगल के तालाब  का पानी प्रवेश कर गया है.  यह बड़ा खतरे का संकेत है. 

 लोग बताते हैं कि राष्ट्रीयकरण के पहले यहां भूमिगत खदान चलती थी.  बाद में कोयला तस्करों ने पिलर को भी काट दिया।  इसके बाद जमीन खोखली हो गई, जिससे लगातार गोफ  बनने की घटनाएं हो रही हैं.  रात को ही घटना की सूचना मिलने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे, प्रबंधन ने   घेराबंदी कर दी है.  गोफ  में जा रहे पानी को डाइवर्ट करने के भी उपाय किए गए है.  सूत्र बता रहे हैं कि गुरुवार की सुबह गोफ  की भराई  का काम शुरू किया गया है.  गोफ  स्थल के अगल-बगल में बड़ी आबादी रहती है.  वाटर सप्लाई प्लांट भी है.  लोगों का आना  जाना भी है.  बता दें कि  छाताबाद  में 7 अगस्त को हुई भू धंसान  की घटना में एक दर्जन से अधिक घर जमींदोज  हो गए थे.  

 इसके बाद वार्ड पार्षद मोहम्मद शहाबुद्दीन के नेतृत्व में 8 अगस्त से जीटीए आउटसोर्सिंग के समीप आशियाना बचाओ आंदोलन  शुरू किया गया था.  आंदोलन को कई मंत्री, विधायक, सांसद और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिला था.  सुरक्षा को देखते हुए डीजीएमएस   ने आउटसोर्सिंग का काम बंद करा  दिया था.  कई मांगों पर सहमति बनने के बाद 25 अगस्त को आंदोलन समाप्त किया गया.  आंदोलन खत्म होने के अगले दिन ही घटना घट गई.  सवाल उठता है कि धंसान ,धंसान   और  कितने धंसान होंगे ?भू धंसान में  कितने घर जमींदोज  होंगे?  7 अगस्त की घटना के बाद पहुंचे मंत्री और जनप्रतिनिधियों को यहां के लोग अब पूछ रहे हैं कि इलाके का क्या होगा? यह एक बड़ा सवाल उभर कर सामने आया है.