धनबाद (DHANBAD): कोयलांचल की राजनीति इन दिनों लट्टू की तरह घूम रही है. सभी बड़े और छोटे नेताओं की नजर कोयलांचल पर टिकी हुई है. चाहे वह विधायक जयराम महतो हों, सुदेश महतो हों, झामुमो का नेतृत्व हो या फिर भाजपा के नेता. हर कोई कोयलांचल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटा है. धनबाद को वैसे तो भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है. आज भी धनबाद जिले की तीन विधानसभा सीटें धनबाद, झरिया और बाघमारा भाजपा के पास हैं. लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद कोयलांचल की राजनीति में कई समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने भी कोयलांचल में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं.
इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. दूसरी ओर, जयराम महतो भी धनबाद में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं. आपको बता दें कि विधानसभा चुनाव में जयराम महतो के प्रभाव के कारण भाजपा को कई सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा था. वहीं, उसके सहयोगी दल आजसू को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा था. अब आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो इसी नुकसान की भरपाई करने और कोयलांचल में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं.शनिवार को धनबाद में अखिल भारतीय पटेल सेवा संघ की ओर से लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 191वीं जयंती मनाई गई.
इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के पूर्व उप मुख्यमंत्री और आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से माइनिंग के अंदर सेल्फ माइनिंग चल रही है. सरकार के निर्धारित नियमों से अधिक निजी खदानें चल रही हैं और सरकारी अधिकारी उन्हें संरक्षण दे रहे हैं.अब सवाल यह है कि क्या सुदेश महतो की कोयलांचल में बढ़ती सक्रियता आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर की जा रही है? क्या आजसू एक बार फिर धनबाद में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन हासिल कर पाएगी? और जयराम महतो की बढ़ती लोकप्रियता का मुकाबला करने के लिए भाजपा और आजसू की रणनीति क्या होगी?
