धनबाद(DHANBAD): रांची में छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है ,तो दूसरी ओर आन्दोलनलारियों को मिल रहा सपोर्ट भी बढ़ता जा रहा हैं. अब तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी आंदोलनकारी छात्रों का साथ मिल गया है. इससे छात्र उत्साहित हैं. जंतर मंतर के बाद रांची में चल रहा आंदोलन सुर्खियां बटोर रहा है. झारखंड की चर्चा पूरे देश में हो रही है. सरकार भी लचीला रुख हथियार किया है और वह वार्ता के लिए छात्रों को आमंत्रित भी किया है. झारखंड सरकार ने हाई पावर कमेटी भी गठित कर दी है. छात्रों ने भी वार्ताकार समिति की घोषणा की हैं. लेकिन सरकार सिर्फ छात्रों से बात करना चाहती है. छात्रों ने अपने 11 वार्ताकार समिति में दो पत्रकार और एक पूर्व महाधिवक्ता को शामिल किया हैं. इस वजह से गतिरोध पैदा हो गया है. दूसरी ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लगातार लोग अपील कर रहे हैं कि छात्रों से बात होनी चाहिए। संवाद की शुरुआत होनी चाहिए। इधर, धनबाद के अशोक कुमार सिंह ने भी मुख्यमंत्री के नाम एक खुला पत्र जारी किया है. अपने सोशल मीडिया पर उन्होंने पत्र जारी कर मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने कहा है कि -------
माननीय मुख्यमंत्री जी,
सादर प्रणाम।
मैं यह पत्र किसी राजनीतिक दूष्टिकोण से नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं की चिंता को ध्यान में रखते हुए एक जागरूक नागरिक के रूप में लिख रहा हूँ। झारखंड राज्य के गठन को लगभग 26 वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान JPSC द्वारा आयोजित लगभग हर संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा किसी न किसी कारण से विवादों में रही हैं। कहीं चयन प्रक्रिया पर प्रश्न उठे, कहीं उत्तर कुंजी पर, कहीं मूल्यांकन पर, कहीं साक्षात्कार पर, तो कहीं OMR शीट और परीक्षा संचालन पर। कई मामलों में अभ्यर्थियों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा और प्रथम तथा द्वितीय संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मामलों की CBI जांच भी वर्षों से चल रही है।यह स्थिति केवल किसी एक सरकार के कार्यकाल तक सीमित नहीं रही। इन वर्षों में झारखंड में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें रहीं, मुख्यमंत्री बदले, मंत्री बदले, लेकिन JPSC को लेकर उठने वाले विवाद समाप्त नहीं हुए।
आज की स्थिति और भी चिंताजनक है। वर्तमान में 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2025-26) भी गंभीर विवादों के कारण चर्चा में है। OMR शीट, उत्तर कुंजी, परीक्षा संचालन और परिणाम को लेकर CID जांच चल रही है और छात्र CBI या न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।मुख्यमंत्री जी, झारखंड के युवाओं की सबसे बड़ी पीड़ा यह भी है कि प्रथम (2002-03) और द्वितीय (2004-05) संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इन मामलों की जांच CBI को सौंपी गई। वर्ष 2003-04 में प्रथम परीक्षा और वर्ष 2005 में द्वितीय परीक्षा से संबंधित मामलों में CBI ने विस्तृत जांच की, कई आरोपपत्र (चार्जशीट) दायर किए और न्यायालय में मामले चल रहे हैं। किंतु दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इन मामलों का ऐसा अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिससे युवाओं को यह विश्वास मिल सके कि दोषियों को समयबद्ध और निर्णायक दंड मिला तथा भविष्य के लिए स्पष्ट संदेश स्थापित हुआ।
मुख्यमंत्री जी, आज झारखंड का युवा केवल नौकरी नहीं चाहता, बल्कि एक ऐसी परीक्षा व्यवस्था चाहता है जिस पर उसे पूर्ण विश्वास हो। युवाओं के विश्वास को पुनः स्थापित करना आज सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि राज्य सरकार निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करे-
1. JPSC की कार्यप्रणाली की व्यापक संस्थागत समीक्षा कराई जाए,2. परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, मुद्रण, मूल्यांकन एवं परिणाम प्रक्रिया के लिए आधुनिक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत तंत्र विकसित किये जाएँ।3. OMR शीट एवं उत्तर पुस्तिकाएँ अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएँ।
4. उत्तर कुंजी पर आपत्तियों के निस्तारण की समयबद्ध और पारदर्शी प्रणाली लागू की जाए,5. परीक्षा प्रक्रिया का स्वतंत्र तकनीकी एवं प्रशासनिक ऑडिट समय-समय पर कराया जाए।6. किसी भी स्तर पर अनियमितता सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी, एजेंसी अथवा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट कानूनी प्रावधान सुनिश्चित किया जाए।7. यदि आवश्यक हो तो JPSC से संबंधित नियमों एवं अधिनियम में संशोधन कर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि भविष्य में किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न न लगे।8. प्रथम (2002-03) एवं द्वितीय (2004-05) परीक्षाओं सहित लंबित CBI मामलों में भी शीघ्र सुनवाई और समयबद्ध निष्कर्ष सुनिश्चित कराया जाए ताकि न्याय में विलंब युवाओं के साथ अन्याय न बने।
मुख्यमंत्री जी, यह केवल झारखंड के वर्तमान का ही नहीं ,भविष्य का भी बड़ा सवाल है. राज्य के लाखों युवाओं का विश्वास पुनः स्थापित करना आवश्यक हैं। आपकी सरकार यदि ठोस, कठोर और दूरगामी सुधारात्मक कदम उठाएगी, तो JPSC एक ऐसी संस्था बनेगी जिस पर हर झारखंडी युवा गर्व कर सकेगा।
