Jharkhand

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से झामुमो के शहरी पैठ को कोयलांचल से लेकर संथाल तक क्यों लगेगा बड़ा झटका,पढ़िए 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD): मंत्री सुदिव्य  कुमार सोनू के आकस्मिक निधन से केवल सरकार को ही नहीं, बल्कि पार्टी को भी बड़ी क्षति  हुई है.  सोनू फिलहाल झामुमो को  ग्रामीण क्षेत्र के अलावा शहरी क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने में लगे हुए थे.  इसके लिए उन्होंने युवाओं की टोली तैयार की थी.  टाइगर जगरनाथ  महतो के निधन के बाद सुदिव्य  कुमार सोनू खासकर कोयलांचल यानी धनबाद, बोकारो, गिरिडीह में झामुमो के  बड़े चेहरे के रूप में उभरे थे.  संगठन और सरकार दोनों में उनकी मजबूत पकड़ थी. 

2023 में टाइगर जयराम महतो के निधन के बाद सुदिव्य  कुमार सोनू को कोयलांचल  की जिम्मेवारी मिली थी.  झामुमो  के नेता बताते हैं कि धनबाद, गिरिडीह, बोकारो के साथ-साथ संथाल की राजनीति में भी सोनू की सक्रिय भूमिका थी. राजनीति के नए दौर में युवाओं को पार्टी से जोड़ने का काम वह कर रहे थे.  झामुमो के स्थापना दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फरवरी महीने में धनबाद आए थे. तो उन्होंने मंच  से घोषणा की थी कि झामुमो  अब गांव में भी होगा और शहर में भी दिखेगा. इसके लिए काम भी शुरू किया गया था और इसकी जिम्मेवारी सोनू के कंधे पर थी.  टाइगर जगरनाथ  महतो के निधन के बाद  सोनू बड़ा चेहरा बनकर उभरे थे. 

 आपको याद होगा कि 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के पहले राष्ट्रीय जनता दल के साथ सीट बंटवारे को लेकर हुई बातचीत में भी सोनू झामुमो  के प्रमुख वार्ताकारों में शामिल रहे.  उनका कार्य क्षेत्र सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं थी, वह पार्टी संगठन और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी  के रूप में काम करते थे.  किसी भी संवेदनशील मामलों में पार्टी नेतृत्व उन पर भरोसा करता था और शायद यही कारण रहा कि  मुश्किल परिस्थितियों में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेवारियां दी जाती थी.  सोनू की संकट से निपटने की क्षमता हाल के छात्र आंदोलन के दौरान भी देखने को मिली थी.  

परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया था.  इस समिति की अध्यक्षता सुदिव्य  कुमार सोनू के पास थी.  उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कई दौर की बातचीत की और आंदोलन को लेकर चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने का प्रयास किया था. छात्र आंदोलन को सुलझाने में अब आगे का चेहरा कौन होगा, सरकार को इसपर गहन मंथन करना होगा. परीक्षा से जुड़े आंदोलन में सेतु का काम कर रहे  सोनू अब नहीं रहे. सरकार आंदोलनकारी छात्रों से लगातार संवाद करने की कोशिश कर रही थी. 

परीक्षाओं में कथित  गड़बड़ी को लेकर पिछले महीने चले छात्र आंदोलन के दौरान सोनू सरकार और आंदोलनकारी के बीच बातचीत का प्रमुख चेहरा बन कर उभरे थे.  बता दें कि रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र आंदोलन कर रहे थे. करीब 25 दिनों के बाद सरकार की ओर से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत शुरू हुई. 7 अगस्त को पहली औपचारिक बातचीत हुई, जिसमें सुदिव्य  कुमार सोनू भी शामिल थे. उन्होंने कहा था कि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी. इसके बाद भी बातचीत का सिलसिला चलता रहा. सुदिव्य सोनू के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उच्च शिक्षा और परीक्षा सुधार से जुड़े उन मुद्दों पर आगे सरकार का चेहरा कौन होगा और पहले से शुरू प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी?