Jharkhand

क्यों कहा जा रहा है कि कतरास की कतरी  नदी से छेड़छाड़ करने वाले 26 सितंबर 1995 के दिन को याद कर लें ,पढ़िए 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD):कोयला उद्योग 26 सितंबर 1995 के दिन  को कभी भूल नहीं सकता है.  कतरास की कतरी  नदी की धारा मुड़ी, तो  पानी गाजलीटांड़ कोलियरी   में प्रवेश कर गया और 64 श्रमिकों  की जल समाधि हो गई.  उसे दिन कोयलांचल  में 331 मिमी वर्षा हुई थी.  फिर एक बार इसी  कतरी  नदी के साथ छेड़छाड़ की गई है.  आउटसोर्सिंग कंपनी अपने फायदे के लिए नदी की धार मोड़ने की कोशिश की है.  नदी में ओवर बर्डन  डाल दिया गया है.  

एक पुल तो हटा लेकिन दूसरा अभी भी मौजूद 

सूत्र बताते हैं कि आरके ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी यहां कोयले का उत्पादन कर रही हैं.  रास्ते के लिए  कतरास- चैतुडीह  मार्ग पर एक पुल बनाया गया था.  रविवार को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू  राय ने निरीक्षण के बाद सवाल उठाया था.  उन्होंने  इसे पर्यावरण के लिए खतरा बताया था.  स्थानीय ग्रामीणों ने पहले भी उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर गलत ढंग से बनाए गए पुल  को हटाने की मांग की थी.  पत्र की कॉपी विधायक को भी भेजी गई थी.  

नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो गया है

कहा गया था कि पुल  निर्माण से नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो गया है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है.  सूत्र बताते हैं कि इस मार्ग पर बना दूसरा पुल  अभी भी मौजूद है. इस पुल से   आउटसोर्सिंग कंपनी के वाहनों का लगातार आवागमन हो रहा है.  ओवर बर्डन भी गिराने  के आरोप लग रहे है. यह वही कतरी नदी है ,जिसने जब रौद्र रूप लिया तो 64 लोगो की जान चली गई थी. गजलीटांड़ हादसा 25-26 सितंबर 1995 की रात को हुआ था.  भारी बारिश के कारण पास की कतरी नदी का बांध टूट गया और पानी सीधे गजलीटांड़ कोलियरी की भूमिगत खदान में भर गया, जिसमें 64 खनिकों की जान चली गई थी.