Jharkhand

सुदिव्य सोनू के निधन के बाद बड़ा सवाल, झारखंड में परीक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर अब कौन होगा सरकार का चेहरा ?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन सरकार के लिए भी आगे संकट पैदा कर सकता है. छात्र आंदोलन को सुलझाने में अब आगे का चेहरा कौन होगा, सरकार को इसपर गहन मंथन करना होगा. परीक्षा से जुड़े आंदोलन में सेतु का काम कर रहे  सोनू अब नहीं रहे. सरकार आंदोलनकारी छात्रों से लगातार संवाद करने की कोशिश कर रही थी. परीक्षाओं में कथित  गड़बड़ी को लेकर पिछले महीने चले छात्र आंदोलन के दौरान सोनू सरकार और आंदोलनकारी के बीच बातचीत का प्रमुख चेहरा बन कर उभरे थे.  

बता दें कि रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र आंदोलन कर रहे थे. करीब 25 दिनों के बाद सरकार की ओर से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत शुरू हुई. 7 अगस्त को पहली औपचारिक बातचीत हुई, जिसमें सुदिव्य  कुमार सोनू भी शामिल थे. उन्होंने कहा था कि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी. इसके बाद भी बातचीत का सिलसिला चलता रहा. सुदिव्य सोनू के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उच्च शिक्षा और परीक्षा सुधार से जुड़े उन मुद्दों पर आगे सरकार का चेहरा कौन होगा और पहले से शुरू प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी? 

उल्लेखनीय है कि जिस तरह जगरनाथ महतो पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए संकटमोचक की भूमिका में काम करते थे. लगभग उसी भूमिका सुदिव्य कुमार सोनू सोनू भी आ गए थे. उनके निधन से झारखंड मुक्ति मोर्चा को बड़ा झटका लगा है. झारखंड कि राजनीति में सोनू की पहचान सिर्फ गिरिडीह के विधायक अथवा मंत्री के रूप में नहीं थी. वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के भरोसे वाले नेताओं में शामिल रहे. लगभग तीन दशक तक वह पार्टी से जुड़े रहे और चुनावी राजनीति के कई उतार-चढ़ाव देखे. 2009 और 2014 में चुनाव हारने के बाद 2019 में पहली बार गिरिडीह से विधायक बने थे. 2024 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी और उसके बाद हेमंत सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. 

लगातार 2009 और 2014 में चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने सक्रिय राजनीति नहीं छोड़ी. संगठन में उनकी भूमिका बनी रही और पार्टी के भीतर उनका प्रभाव बढ़ता गया. 2019 में वह पहली बार चुनाव जीते. भाजपा के निर्भय कुमार शाहबादी को पराजित किया. 2019 में सोनू को 80,000 से अधिक वोट मिले थे जबकि भाजपा की उम्मीदवार को लगभग 65000 वोट मिले थे. कहा तो अभी जाता है कि जब 2024 में हेमंत सोरेन जेल चले गए तो उस समय पार्टी को संगठित रखने में भी उनकी भूमिका रही. 2024 में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को सक्रिय राजनीति में लाने में भी उनकी भूमिका की चर्चा होती रही है. फिलहाल उनके पास उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला संस्कृति ,खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे.