Jharkhand

सवाल: जब BCCL BIFR में गई तो क्यों मद्धिम पड़ गई थी धनबाद की अर्थव्यवस्था? क्या इतिहास फिर खुद को दोहराएगा?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद (DHANBAD): धनबाद की आर्थिक सेहत का आधार बीसीसीएल है. बीसीसीएल जब BIFR में चली गई थी, तो धनबाद की आर्थिक सेहत भी मद्धिम हो गई थी. फिर एक बार चर्चा तेज है कि बीसीसीएल की आर्थिक दशा बिगड़ रही है. ऐसे में धनबाद को चिंतित होना बहुत स्वाभाविक है. राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के महामंत्री ए के झा ने कहा है कि इंदिरा जी द्वारा वर्ष 1971 और वर्ष 1973 में देश के कोकिंग कोल एवं नॉन कोकिंग कोल खदानों का राष्ट्रीयकरण किया था. कोयला खान राष्ट्रीयकरण के बाद भारत कोकिंग कोल लिमिटेड सहित कोल इंडिया लिमिटेड को देश और दुनिया की उच्चतम कंपनियों में तथा भारत के महारत्न कंपनियों में प्रतिस्थापित होने का अवसर मिला.

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, धनबाद, जो देश का कोल कैपिटल कहलाता है, आज संकट के दौर से गुजर रहा है. राष्ट्रीयकरण के 55वें वर्ष में कंपनी,कोयला मजदूर, यहां निवास कर रहे लोग भयभीत हैं, आतंकित हैं, दहशत में हैं. प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर मजदूर तक इस कंपनी के भविष्य पर खड़े किए जा रहे प्रश्न वाचक चिन्ह से दुखी और चिंतित हैं. हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक समय ऐसा भी आएगा कि कंपनी के महाप्रबंधक स्तर के तीन-तीन अधिकारियों पर सुनियोजित ढंग से आर्थिक अपराधियों के द्वारा प्राण घातक हमले किए जाएंगे. कोलियरियों में बसने वाले लोग इन अपराधियों की साजिश से रोज घरविहीन होंगे. भू-धंसान  के कारण मौत के शिकार होंगे. लोगों की जिंदगी मौत के चक्रव्यूह में फंसी रहेगी. जमीन के नीचे हमारी अटूट संपत्ति माइंस और मिनरल्स का असली मालिक भारत सरकार है.

वर्तमान भाजपा सरकार को हमने पिछले 12 वर्ष से सत्तासीन होने का अवसर दिया है, जो सबसे सशक्त, मजबूत सरकार का दावा करते हुए अपना पीठ स्वयं ठोकने का काम करती है. उन्हें इस बात की पूरी जानकारी है कि झारखंड और धनबाद का लाइफ लाइन भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की कोल माइंस ही है, लेकिन सरकार की पूंजीवादी सोच ने आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी प्रथा को मजबूत करने का काम किया है. इस वैभव की नगरी ने धनबाद और झारखंड को विकसित करने में, देश को अधिकतम राजस्व देने का काम किया है. लेकिन आज इसे अपनी बेबसी पर राेना पड़ रहा है चार लेबर कोड, एमडीओ और आउटसोर्सिंग की नीति, कोयला उद्योग और मजदूरों के लिए प्राण घातक है. रोजगार का अवसर बंद कर सरकार ने बड़ी भूल की है. पूंजीवादी सोच और नीति कोयला उद्योग को बर्बाद करने की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है.