Jharkhand

भू-धंसान के खिलाफ कतरास बंद, धनबाद सांसद और बाघमारा विधायक के सामने कितनी बड़ी चुनौती?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद (DHANBAD): कतरास में लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाओं को लेकर गुरुवार, 24 सितंबर को बंद का आह्वान किया गया है. कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा की बैठक में स्थानीय लोगों और प्रतिष्ठान संचालकों से बंद को सफल बनाने की अपील की गई है. कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा का कहना है कि भू-धंसान की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. बीसीसीएल के 12 नंबर क्षेत्र का भी चक्का जाम करने  की चेतावनी दी गई है. यह बंद फिलहाल सीधे तौर पर बीसीसीएल के खिलाफ आंदोलन के रूप में सामने आया है, लेकिन इसका राजनीतिक असर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंच सकता है. 

लोकल राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है यह आंदोलन

लगातार भू-धंसान, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और सुरक्षा का मुद्दा दिन-प्रतिदिन गहरा होता जा रहा है. अब कतरास की लोकल राजनीति में भी महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर रहा है? कतरास क्षेत्र में हाल की घटनाओं के बाद कई जनप्रतिनिधि प्रभावित इलाकों का दौरा कर चुके हैं. 17 सितंबर को छाताबाद के खुशबू मोहल्ला में फिर भू-धंसान हुआ, जिससे कई घरों में दरारें आईं और सड़क भी प्रभावित हुई. जहां लोग अस्थाई रूप से ठहरे थे, सामुदायिक भवन वह भी क्षतिग्रस्त हो गया. इससे पहले भी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने और पुनर्वास की मांग उठती रही है. भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय विधायक के लिए सबसे बड़ा सवाल प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ा है. खास बात यह है कि सांसद भी वहीं रहते हैं.

लोग अब स्थाई समाधान पर अड़े दिख रहे हैं 
 
लोगों की मांग है कि सिर्फ तत्काल राहत नहीं, बल्कि ऐसे क्षेत्रों के लिए स्थायी समाधान किया जाए. इस स्थिति में सांसद-विधायक पर बढ़ा दवाब बाद सकता है. धनबाद सांसद ढुल्लू महतो भी अगस्त में छाताबाद भू-धंसान स्थल का जायजा लेने पहुंचे थे. उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर मदद और पुनर्वास की बात भी कही थी. उस दौरान कुछ महिलाओं की ओर से विरोध भी किया गया था. चूंकि बीसीसीएल केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय के अधीन आता है, इसलिए सांसद की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठना स्वाभाविक है? कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि भू-धंसान और अवैध कोयला उत्खनन पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा. 

अगले चरण में प्रोडक्शन को भी किया जा सकता है

अगले चरण में 12 नंबर क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित करने की चेतावनी भी दी गई है.ऐसे में गुरुवार का बंद केवल बाजार बंद रहने तक सीमित रहता है या आगे चलकर बीसीसीएल की परियोजनाओं और कोयला उत्पादन तक पहुंचता है, यह महत्वपूर्ण होगा. बंद की सफलता और आंदोलन के अगले कदम से यह भी स्पष्ट होगा कि स्थानीय लोगों का आक्रोश किस स्तर तक जा चुका है और जनप्रतिनिधियों पर कितना सार्वजनिक दबाव बनता है. फिलहाल सबसे बड़ा मुद्दा राजनीति से ज्यादा कतरास के लोगों की सुरक्षा, भू-धंसान प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और बीसीसीएल की ओर से स्थायी समाधान का है. इन्हीं मुद्दों पर आने वाले दिनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी जवाब मांगा जा सकता है.