Jharkhand

फिर गरमाई धनबाद में शिलापट्ट की राजनीति, पुटकी में तोड़ा गया सांसद का शिलापट्ट, क्यों छिड़ी है यह लड़ाई

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
फिर गरमाई धनबाद में शिलापट्ट की राजनीति, पुटकी में तोड़ा गया सांसद का शिलापट्ट, क्यों छिड़ी है यह लड़ाई

धनबाद(DHANBAD) : धनबाद की विकास योजनाओं पर शिलापट्ट  की राजनीति हावी हो गई है.  सवाल उठता है कि इस राजनीति से किसको फायदा और किसको नुकसान? जानकारी के अनुसार पुटकी के चिरुड़ीह में  सांसद मद  से बनने वाली पीसीसी सड़क के शीलापट्ट  को तोड़ दिया गया है.  इसके बाद माहौल गरमा गया है. सांसद समर्थक  भाजपा कार्यकर्ता नाराज हैं.  उनका कहना है कि विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने की लगातार कोशिश की जा रही है.  

सांसद प्रतिनिधि राजीव महतो ने पुटकी थाने में शिकायत दर्ज कराई है

सांसद प्रतिनिधि राजीव महतो ने पुटकी थाने में शिकायत दर्ज कराई है.  भाजपा नेताओं ने दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.  दरअसल शिलापट्ट  तोड़े जाने से नुकसान किसका होता है? जिस जनप्रतिनिधि की अनुशंसा पर अथवा उनके  फंड से निर्माण कार्य होता है, तो शीलापट्ट  लगाने की परंपरा  है. आखिर धनबाद में शिलापट्ट की  राजनीति क्यों बढ़ गई है? पुटकी में शिलापट्ट  को किसने तोड़ा, क्यों तोड़ा, यह तो अब पुलिस की जांच में सामने आएगा।  लेकिन सवाल है कि शिलापट्ट  तोड़ा  ही क्यों गया? 

धनबाद की राजनीति एक अजीब ढंग से चल रही

दरअसल, धनबाद की राजनीति एक अजीब ढंग से चल रही है.  धनबाद नगर निगम चुनाव के बाद इस राजनीति की शुरुआत हुई और यह  और यह  बढ़ती ही जा रही है. बताया जाता है कि दरअसल शिलापट्ट  की राजनीति श्रेय लेने के लिए और विरोधियों को नीचा दिखाने के लिए की जाती है.  अक्सर देखा जाता है कि किसी भी दल  के नेता शिलापट्ट   लगाकर अपने  नाम का शोर मचाने की कोशिश करते हैं.  जिसे असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया जाता है. 

शिलापट्ट की राजनीति भी कई तरह से होती है 

इसमें भी किसी न किसी नेता का अप्रत्यक्ष हाथ होता है.  फिर नए सिरे से शिलापट्ट   में नाम लगवाने की मांग शुरू हो जाती है.  कई बार शिलापट्ट   की राजनीति सिर्फ दो दलों के बीच ही नहीं, बल्कि एक ही पार्टी के गुटों के बीच भी चलती है.  ऐसे  में विकास योजनाएं भी प्रभावित होती हैं.  दरअसल, निगम चुनाव के बाद धनबाद में एक महीन  राजनीति की शुरुआत हुई है.  एक दूसरे के क्षेत्र में जाकर जनसभाएं, सम्मान समारोह करने की परिपाटी शुरू हुई है.