Jharkhand

झरिया में पानी संकट पर टूटा धैर्य ,अब कैसे हालात संभालेंगें मेयर संजीव सिंह  और विधायक रागिनी सिंह 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD):इस बरसात के मौसम में भी धनबाद की झरिया बूंद -बूंद पानी को तरस रही है.  अब तो आक्रोश भी भड़क रहा है.  7 से 8 दिनों से झरिया में जलापूर्ति नहीं हुई है.  झरिया के लोग पानी आपूर्ति बहाल करने के लिए द्वारे -द्वारे   घूम रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है.  लाचार होकर झरिया के व्यावसायिक संगठनों ने आनंद भवन तालाब के पानी में खड़े होकर मंगलवार को जल सत्याग्रह किया।  उनका कहना था कि लगातार सातवें दिन भी क्षेत्र में जलापूर्ति ठप है.  इलाके के लोग त्राहि त्राहि कर रहे हैं.  उनका कहना था कि आज तक किसी भी सरकार ने झरिया को प्राथमिकता नहीं दी.  

आखिर झरिया  के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों?

आखिर झरिया  के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? 2019 में केंद्र सरकार द्वारा हर घर जल योजना के तहत राशि आवंटित की गई थी.  लेकिन 7 साल बीत जाने के बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है .  झरिया में जलापूर्ति का जिम्मा झमाडा  के पास है.  जामाडोबा जल संयंत्र से झरिया में जलापूर्ति होती है.  झमाडा  खुद ही इतना "बीमार" हो चुका है कि वह झरिया की प्यास बुझाने में सक्षम नहीं हो रहा है.  फिर भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा रही है.  झरिया की विधायक अभी रागिनी सिंह हैं.  और उनके पति संजीव सिंह धनबाद नगर निगम के मेयर हैं.  बावजूद झरिया की प्यास नहीं बुझ  रही है.  

योजना बनाकर झरिया को किस्तों में मारा जा रहा 

बता दे कि  किस्तों में झरिया को मारा जा रहा है.  झरिया पर भले ही सरकार अथवा जनप्रतिनिधि या प्रशासन का ध्यान नहीं हो, लेकिन अभी भी झरिया कारोबार का केंद्र बनी हुई है.  झरिया का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है.  वह अपनी आंचल में करोड़ों की खनिज संपदा लिए बैठी हैं.  यह  अलग बात है कि भूमिगत आग  की वजह से झरिया में प्रदूषण भी बहुत है.  झारखंड के पहले नगर विकास मंत्री बच्चा बाबू (अब स्वर्गीय) झरिया से ही विधायक बनकर नगर विकास मंत्री बने थे.  लेकिन झरिया को पानी संकट से छुटकारा नहीं दिला सके. 

धनबाद की झरिया देश की अनूठी  कोयला बेल्ट है

धनबाद की झरिया देश की अनूठी  कोयला बेल्ट है.  दुनिया भर से अच्छी गुणवत्ता का कोयला झरिया में ही मिलता है.  विशेषता यह भी है कि यह कोयला जमीन के बहुत   करीब होता है.  कोयला खनन का यहाँ  इतिहास बहुत पुराना  है.  1884 से झरिया इलाके में कोयला का खनन किया जा रहा है. भूमिगत आग का पता भी 1919 में इसी इलाके से चला.  कोयलांचल की अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र पहले झरिया थी.  आज भी कमोवेश  है.  विशेषता 1977 के बाद से अगर बात की जाए तो  सूर्यदेव सिंह झरिया विधानसभा से चार बार विधायक रहे.  उनके निधन के बाद दो बार उनकी पत्नी और एक बार उनका बेटा विधायक रहे. उनके भाई बच्चा सिंह भी विधायक रहे.    सूर्यदेव सिंह के भाई की बहू पूर्णिमा नीरज सिंह झरिया विधानसभा से विधायक रह चुकी है. .  अभी सिंह मेंशन 
के बहू रागनी सिंह झरिया से विधायक हैं.