Jharkhand

देश में कोयला उत्पादन का बढ़ा दवाब तो क्या कर रहा कोयला मंत्रालय,क्यों हो रही रियायत की फेहरिश्त लम्बी 

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
देश में कोयला उत्पादन का बढ़ा दवाब तो क्या कर रहा कोयला मंत्रालय,क्यों हो रही रियायत की फेहरिश्त लम्बी 

धनबाद(DHANBAD): कोयला प्रोडक्शन को लेकर कोयला मंत्रालय दबाव में है.  कोयला खनन के क्षेत्र में प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नियमों में बदलाव करने की बात सामने आई है.  कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया है कि आवंटित खदानों को चालू करने की  समय सीमा को घटाकर  40 महीने कर दी गई है.  पहले यह 51 महीने थी.  यह भी बताया गया कि यह नियम पूरी तरह से खोजी गई खदानों के लिए लागू किया गया है.  आंशिक रूप से खोजे गए कोल ब्लॉकों के लिए भी समय सीमा 66 महीने से घटाकर  52 महीने कर दी गई है. 

कई तरह की रियायत दे रही सरकार ,अब आगे क्या 
 
सिर्फ समय सीमा ही कम नहीं हुई है.  खदानों को चालू करने में मदद के लिए सरकार ने सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल और एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट भी शुरू किया है.  अग्रिम भुगतान में भी राहत दिया गया है.  अग्रिम भुगतान की आवश्यकता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है.  बता दें कि कोकिंग कोल्   को एक क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में शामिल किया गया है.  इंसेंटिव भी लागू करने का प्रावधान किया गया है.  वैसे कोल्  इंडिया लिमिटेड अपनी भूमिगत खदानों में सतत खनन मशीनों, लॉन्ग वाल और हाईवॉल मशीनों की तैनाती के साथ मास प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी जैसी नई और आधुनिक तकनीक अपना रही है.  खुली खदानों में उच्च क्षमता वाले यंत्रों का उपयोग किया जा रहा है. 

कोयले के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए किये जा रहे बदलाव 
 
सरकार का मुख्य उद्देश्य कोयले के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और देश में कोयले के गैर जरूरी आयात को समाप्त करना है. उल्लेखनीय है कि कोल् इंडिया की सबसे बड़ी इकाई  बीसीसीएल चालू वित्तीय वर्ष की  पहली तिमाही में उत्पादन लक्ष्य से काफी पीछे है.  मतलब आर्थिक मोर्चे पर कंपनी संघर्ष कर रही है.  मंगलवार को बीसीसीएल बोर्ड की बैठक में पहली तिमाही के लेखा - जोखा पर चर्चा हुई.  उत्पादन और डिस्पैच लक्ष्य से  कंपनी पीछे चल रही है.  आंकड़े बताते हैं कि   चालू वित्तीय वर्ष की   पहली तिमाही में बीसीसीएल लक्ष्य प्राप्ति के मामले में केवल 71.72% ही पहुंच सकी है.  आंकड़े बताते हैं कि  डिस्पैच में भी 15 19% की गिरावट दर्ज की गई है.  पहली तिमाही में बीसीसीएल का कुल डिस्पैच में भी गिरावट दर्ज की गई है.