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Jharkhand

बिहार से राजनीतिक जीवन शुरू करने वाले मन्नान मल्लिक आज होंगे सुपुर्दे ए खाक,कांग्रेस में सबके थे चहेते

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद: झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे मन्नान मल्लिक का पार्थिव शरीर मंगलवार की रात लगभग 9:00 बजे रांची से धनबाद पहुंचा. उनके आवास पर भारी संख्या में उनके शुभचिंतक और राजनीतिक दल के लोग पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे थे. 

बुधवार को वासेपुर के शमशेर नगर कब्रिस्तान में उनकी मिट्टी मंजिल की जाएगी. इससे पहले धनबाद जिला कांग्रेस कार्यालय में भी पार्थिव शरीर को ले जाया जाएगा. मन्नान मल्लिक के निधन से धनबाद को एक बड़ी क्षति हुई है. स्पष्टवादी मन्नान मल्लिक को जिसे भी कुछ कहना होता, खुलकर कहते थे. कभी भी उन्होंने किसी विशेष संप्रदाय की राजनीति नहीं की और नहीं ऐसी सोच को कभी समाज पर हावी होने दिया. 

सबसे खुलकर मिलते थे. उनकी उम्र लगभग 83 साल थी .राजनीति में भी उनकी अलग पहचान थी . कहा जाये तो उनकी पहचान केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं थी, बल्कि कोयलांचल की मजदूर राजनीति में भी उनकी पकड़ मजबूत थी. उन्होंने श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, बेहतर वेतन और कार्य परिस्थितियों में सुधार को लेकर लगातार आवाज बुलंद की.

 2009 में हेमंत सोरेन की सरकार में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री बने थे. मंत्री रहते हुए उन्होंने धनबाद के लिए बड़े काम किए. उन्होंने धनबाद को पहला 6000 लीटर क्षमता वाला सरकारी डेयरी प्लांट दिया. मन्नान मल्लिक ने ही  भू दा में मेधा डेयरी की शुरुआत कराई थी. मंत्री रहते हुए शहर के मोहल्ले में पक्की सड़क का निर्माण कराया था. 

धनबाद कोर्ट में उन्होंने बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस भी की थी. धनबाद में कांग्रेस को मजबूत करने वाला उन्हें नेता माना जाता था और यही वजह है कि एक दशक से अधिक समय तक वह कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रहे. वह राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ और राष्ट्रीय कोलरी मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष रहे. 2011 में जब  मट कुरिया में आवास खाली कराए जा रहे थे, उस समय अन्य के साथ वह चट्टान बनकर खड़े दिखे. 

इसी मामले में बीते शुक्रवार को उन्हें 3 साल की सजा सुनाई गई थी. मंगलवार को रांची के अस्पताल में उनका निधन हो गया. मंगलवार को विधानसभा परिसर में उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. जहां मुख्यमंत्री, स्पीकर, मंत्री सहित अन्य नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के साथ 1975 में की थी. वह अब्दुल गफूर के निजी सचिव थे.