Jharkhand

खौफ में कोयलांचल की जिंदगी: बड़ा सवाल -कब तक घर ढहते रहेंगे और लोग मरते रहेंगें, हादसों पर कब तक चलेगी नेतागिरी ?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल की जिंदगी खौफ  में गुजर रही है.  कोलियरी क्षेत्र में रहने वाले लोग कब बेघर हो जाएंगे, कब वह  जमीन में चले जाएंगे, इसकी चिंता से रात भर सो नहीं पाते।  लगातार धंसान  की घटनाएं हो रही है.  झरिया पुनर्वास फेज - टू की राशि भी आवंटित हो गई है.  कोयलांचल पर सीधे पीएमओ की नजर है, फिर भी पुनर्वास की रफ्तार जरूरत के हिसाब से नहीं है. घटना होने पर नेता पहुंचते हैं ,दोषारोपण करते है ,इसके सिवा न कुछ वह करते हैं और न कुछ होता है.   धनबाद और इसके आसपास के कोयलांचल क्षेत्र में पिछले चार महीनों में, खासकर मानसून के दौरान, भू-धंसान और गोफ बनने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई हैं. 

 हाल ही में छाताबाद में दर्जनों घरों के जमीन में समा जाने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं है. इस साल जनवरी से अब तक धनबाद जिले में करीब दो दर्ज़न से  अधिक छोटी-बड़ी भू-धंसान की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.  इनमें बड़ी संख्या पिछले तीन से चार महीनों के दौरान हुई हैं. 
कोयलांचल में मानसून की बारिश के दौरान भूमिगत खोखले हिस्सों में पानी रिसने से जमीन के धंसने का खतरा बढ़ जाता है.  इसके अलावा दशकों से जल रही भूमिगत कोयला खदानों की आग वाले क्षेत्रों में भी जमीन कमजोर होने का खतरा बना रहता है.  वहीं, धनबाद में अवैध खनन को भी भू-धंसान की घटनाओं का एक प्रमुख कारण माना जाता है. अगर हाल की बड़ी घटनाओं पर नजर डालें तो अगस्त और सितंबर में कई गंभीर मामले सामने आए हैं. 

17 अगस्त 2026 को गोधर में घरों के पास तेज धमाके के साथ जमीन फट गई थी.  इसके बाद जमीन पर दरारें बढ़ने लगीं, जिसके कारण आसपास के घरों को खाली कराया गया। हालांकि, इस घटना में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं थी. 6 अगस्त 2026 को छाताबाद में हुई घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था.  इस हादसे में दर्जनभर से अधिक घर पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि करीब 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. 31 अगस्त 2026 को लकड़का , 6 नंबर, कतरास में घास चर रही एक गाय अचानक जमीन धंसने से बने गहरे गड्ढे में समा गई. 

इसी दिन, लिलोरी पथरा, झरिया के लोना क्षेत्र में भूमिगत धमाके के बाद एक घर के सामने बड़ा गोफ बन गया। इस घटना में घर का एक हिस्सा सीधे जमीन के अंदर समा गया। इसके बाद क्षेत्र के करीब 182 परिवारों पर खतरा मंडराने लगा और प्रभावित परिवार तत्काल विस्थापन की मांग कर रहे हैं।4 सितंबर 2026 को केंदुआ स्थित कुर्मीडीह  पांडे बस्ती के घनी आबादी वाले अग्नि प्रभावित क्षेत्र के पास अचानक दो बड़े गोफ बन गए। इन जगहों से लगातार जहरीली गैस और धुएं का रिसाव होने लगा, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

8 सितंबर 2026 यानी आज तड़के सुबह काली मंदिर के पास सिजुआ  क्षेत्र में तेज आवाज के साथ अचानक जमीन धंस गई। देखते ही देखते बड़ा गोफ बन गया। इस हादसे में 10 वर्षीय एक बच्चे की  मौत हो गई, जबकि कई लोग मलबे में दबकर घायल हो गए। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजा और तत्काल पुनर्वास की मांग को लेकर सड़क जाम कर दी. 

रिपोर्ट -प्रकाश महतो