Jharkhand

झारखंड राज्यसभा चुनाव : माले के दावे के बाद क्या फंस गया है महागठबंधन में पेंच, क्या बिहार की भी बढ़ेगी भूमिका?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड में राज्यसभा चुनाव का समीकरण वन और बिगड़ रहा है. लड़ाई दिलचस्प होगी, इसमें कोई संदेह नहीं. महागठबंधन वाले पहले अपने में लड़ेंगे, उसके बाद भाजपा के उम्मीदवार से लड़ाई होगी. शनिवार को धनबाद पहुंचे वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि महागठबंधन के 56 विधायक एक जुट  है और दो सीट निकालने में कहीं कोई दिक्कत नहीं होगी. इस बीच सूत्र बता रहे हैं कि माले ने भी कांग्रेस की तरह एक सीट पर अपना दावा पेश कर दिया है. माले के झारखंड में दो विधायक हैं. ऐसे में महागठबंधन के भीतर का समीकरण क्या स्वरूप लेगा, माले पीछे हटेगी या अपने निर्णय पर अडिग रहेगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा. 

राजद के चार विधयक हैं, तेजश्वी यादव का भी चाहिए समर्थन

इधर, सूत्र बता रहे हैं कि महागठबंधन की दो सीटों पर जीत की चाबी बिहार के पास रहेगी. राजद के चार विधायक हैं. चार विधायक तेजस्वी यादव के निर्देश की प्रतीक्षा करेंगे, ऐसे में आगे क्या होगा यह कहना मुश्किल है. इस चाबी को पाने के लिए झामुमो, कांग्रेस सहित गठबंधन के दलों को तेजस्वी यादव का समर्थन लेना होगा. यह अलग बात है कि अभी तक उम्मीदवारों के नाम तय नहीं हुए हैं, लेकिन इतना तो तय है कि एक सीट जहां झामुमो अकेले अपने दम पर निकाल लेगा, लेकिन दूसरी सीट में पेंच फंसेगी. बड़ी बात यह है कि भाजपा ने भी संख्या बल नहीं होने के बावजूद उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है. भाजपा की यह सोच है कि ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए, जो अपने बलबूते भी समर्थन जुटा सके.  
 
कांग्रेस चाहती है कि चुनाव अभियान को सीएम लीड करें
 
कांग्रेस चाहती है कि राज्यसभा चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अभियान का नेतृत्व करें और कांग्रेस के उम्मीदवार को जिताने में मदद करें. इसके लिए झारखंड प्रभारी, तेलंगाना के डिप्टी सीएम रांची में मुख्यमंत्री से मुलाकात की है. इधर, सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के 2-3 नेता राज्यसभा के लिए अपनी दावेदारी कर दी है. इधर, दूसरी सीट के लिए राजद के चार वोट महत्वपूर्ण होंगे और यह चार सीट तेजस्वी यादव के पास है. यह बात भी सच है की दूसरी सीट के लिए राजद और माले के बिना महागठबंधन की जीत संभव नहीं है. 

"हॉर्स ट्रेडिंग" के लिए झारखंड कुख्यात रहा है

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव में "हॉर्स ट्रेडिंग" के लिए झारखंड कुख्यात रहा है. चाहे 2012 का मामला हो अथवा 2016 का, झारखंड हमेशा से चर्चा में रहा है. जानकार सूत्रों के अनुसार 2016 में संख्या बल की कमी के बावजूद भाजपा के दूसरे उम्मीदवार की जीत हुई थी और इस जीत ने विवादों को जन्म दिया था. झारखंड में दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान होना है. इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर "हॉर्स ट्रेडिंग" की आशंका जताई है. झामुमो  की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि गठबंधन के पास दोनों सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन( एनडीए) के पास संख्या बल कम है.