Jharkhand

Rajya Sabha Election: तेवर अचानक क्यों पड़ गए नरम, क्यों बैकफुट पर आई प्रदेश काँग्रेस

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): क्या माले के महासचिव के पत्र पर एक्शन हो गया है ? कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व गंभीर हो गया है ? क्या झारखंड के कांग्रेस नेताओं को खबरदार कर दिया है?अब लगता है कि झारखंड में कांग्रेस अपने ही जाल में उलझ गई है. झारखंड प्रदेश के बड़े से छोटे नेता प्रदेश प्रभारी के राजू के बचाव में उतर गए हैं. कह रहे हैं कि सरकार में उनका समर्थन जारी रहेगा चाहे, क्यों ना उन्हें बिष ही पीना पड़े. इस बात की खूब चर्चा हो रही है. दरअसल, झारखंड में राज्यसभा चुनाव के बाद झारखंड से लेकर बिहार तक हल्ला मचा हुआ है. कोई यह नहीं कह रहा है कि आखिर हार की वजह क्या है, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप खूब चल रहे है.  

कांग्रेस प्रभारी के राजू ने 18 जून को परिणाम आने के बाद क्या कहा था 

कांग्रेस प्रभारी के राजू ने 18 जून को परिणाम आने के बाद कहा था कि राजद और माले का वोट कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को नहीं मिला, इसलिए हार हुई. इसके बाद तो राजद और माले हाथ धोकर कांग्रेस के पीछे पड़ गए हैं. पूछ रहे हैं कि आरोप की सच्चाई क्या है, सबूत क्या है? कांग्रेस से ही भितरघात की खबरें आने लगी, तो क्या प्रभारी का आरोप लगाना पूरी पार्टी पर भारी पड़ गया है ? कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कहते हैं कि जो धोखा और विश्वासघात हुआ है, यह महागठबंधन और मुख्यमंत्री के साथ हुआ है. हमें इंतजार है कि मुख्यमंत्री इसकी जांच करेंगे और दोषी पर कार्रवाई होगी. राजद और माले की तरफ से कांग्रेस पर लगाए जा रहे आरोप बे-बुनियाद है.  

प्रदीप यादव बोले: झारखंड में गठबंधन की सरकार चलती रहेगी 

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव का कहना है कि झारखंड में महागठबंधन की सरकार चलती रहेग कांग्रेस सरकार से अलग नहीं होगी, भाजपा की दाल यहां नहीं गलने वाली है. मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा है कि राज्यसभा चुनाव में हार सिर्फ कांग्रेस की नहीं, पूरे गठबंधन की हुई है. इस पर गठबंधन के सभी लोगों को चिंतित होना चाहिए. कांग्रेस विष  पीने को तैयार है, लेकिन गठबंधन अटूट रहना चाहिए. मतलब साफ है कि कांग्रेस गठबंधन तोड़ने के पक्ष में नहीं है, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप रांची से लेकर पटना तक लग रहे हैं. पटना में कांग्रेस और राज्य के प्रवक्ता आपस में भिड़ गए और एक दूसरे के खिलाफ बयान बाजी कर रहे हैं. माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने तो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा है कि झारखंड के कांग्रेस नेताओं को नियंत्रित किया जाना चाहिए. क्योंकि वह लगातार बेमतलब बयान दे रहे है. यह अलग बात है कि इस विवाद में झामुमो की ओर से कोई अधिकृत बयान नहीं आया है. सवाल उठ रहे कि आखिर कांग्रेस को अपने प्रदेश प्रभारी के बचाव में क्यों उतारना पड़ा ? क्या कांग्रेस को गठबंधन में कोई खतरा है? मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुपी क्या कांग्रेस के नेताओं को परेशान किए हुए हैं? कांग्रेस कोटा के चार मंत्री मंत्रिमंडल में हैं. 

दीपांकर भट्टाचार्य ने 19 जून को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखा था पत्र

माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने 19 जून को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा है कि यह जानकर हैरानी हो रही है कि कांग्रेस झारखंड के राज्यसभा में हार के लिए माले  को जिम्मेदार बता रही है. उन्होंने कहा है कि यह सफेद झूठ है. माले के दोनों विधायक ने प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया है. पार्टी के पोलिंग एजेंट ने इसकी जांच की है. महासचिव ने कहा है कि यह पत्र इसलिए लिख रहे हैं कि तत्काल प्रभाव से माले के विधायकों के खिलाफ चलाया जा रहा प्रोपेगेंडा को बंद कराया जाए. इससे पार्टी की छवि धूमिल हो रही है. उन्होंने यह भी कहा है कि बिहार और झारखंड में माले के विधायक विपक्षी उम्मीदवारों को वोट किया है. उन्होंने याद दिलाया है कि माले समर्पित पार्टी है और इंडिया ब्लॉक के निर्माण में उसकी बड़ी भूमिका रही है. उन्होंने कहा है कि तुरंत कांग्रेस के नेताओं को कहा जाए कि झूठे आरोप लगाना बंद कराया जाये. इसे महागठबंधन में गलत संदेश जाएगा.