धनबाद(DHANBAD): झारखंड कांग्रेस में कुछ ना कुछ चल रहा है. यह अलग बात है कि सब कुछ अभी परदे के पीछे रखने की कोशिश की जा रही है. लेकिन चर्चा हो ही जाती है. झारखंड में कांग्रेस कोटे के वित्त मंत्री नाराज चल रहे हैं. उनकी नाराजगी को महत्व नहीं मिल रहा है. अलबत्ता कुछ दूसरा होने का संदेह व्यक्त किया जा रहा है. पहले कांग्रेस संगठन से उनकी ठनी और अब सरकार से ठन गई है. इस बीच कांग्रेस के विधायक और मंत्री सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिल रहे है. इस अभियान को कई एंगल से देखा जा रहा है.
इस बीच धनबाद पहुंची एक सूचना के मुताबिक झारखंड प्रदेश आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष का मनोनयन कर दिया गया है. राज उरांव मनोनीत किए गए हैं. बताया जाता है कि केंद्रीय महासचिव कैसी वेणु गोपाल ने इस संबंध पत्र जारी कर दिया है. कहां जा रहा है कि राज उरांव की नियुक्ति झारखंड में आदिवासी समाज के बीच कांग्रेस संगठन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. झारखंड में राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर राज उरांव का मनोनयन राजनीति का बड़ा हिस्सा हो सकता है. भाजपा द्वारा भी आदिवासी क्षेत्रों में पैठ बनाने की लगातार कोशिश की जा रही है.
इस बीच कांग्रेस ने भी आदिवासी वोट बैंक को और मजबूत करने का दांव खेल दिया है. उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनाव के बाद झारखंड में विशेष कर कांग्रेस की राजनीति में अस्थिरता दिख रही है. कांग्रेस के विधायक और मंत्री अलग-अलग राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिल रहे है. इन सब कारणों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. दरअसल,कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा राज्यसभा के उम्मीदवार थे. लेकिन आवश्यक संख्या बल के बावजूद उनकी हार हो गई. इसके बाद से ही कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है. वित्त मंत्री राधा किशोर नाराज चल रहे है. वह दिल्ली भी गए थे. सूत्र बता रहे हैं कि वह कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात भी की थी. .
चर्चा तो यह भी थी कि मंत्री इरफान अंसारी भी दिल्ली गए थे और उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात की थी. सूत्र बता रहे हैं कि नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष को राज्यसभा चुनाव में क्या-क्या हुआ, उसका फीडबैक दे रहे हैं. दरअसल, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की किरकिरी हुई है. परिणाम आते ही कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के राजू ने राज्यसभा चुनाव में राजद और माले के विधायकों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने का आरोप लगाया था. लेकिन भीतर ही भीतर कांग्रेस के एक दो विधायक भी संदेह के घेरे में हैं. के राजू के बयान के बाद तो विस्फोटक स्थिति पैदा हो गई थी. माले और राजद नाराज हुआ और कांग्रेस के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई थी. फिलहाल बयानबाजी तो नहीं हो रही है, लेकिन अंदर ही अंदर खिचड़ी पक रही है और इसी क्रम में कांग्रेस के विधायक और मंत्री दिल्ली दरबार में अपनी बात रख रहे है.
