धनबाद(DHANBAD): झारखंड में भाजपा ने बड़े पैमाने पर उलट फेर किया है. गुटबाजी से आजिज केंद्रीय नेतृत्व ने बड़े बदलाव किए हैं. मध्य प्रदेश के सांसद गजेंद्र सिंह पटेल को बीजेपी झारखंड प्रभारी बनाया गया हैं. छत्तीसगढ़ के सौरभ सिंह और बिहार के निवेदिता सिंह सह प्रभारी बने हैं. पवन साय को संगठन महामंत्री की जिम्मेवारी दी गई है. मतलब साफ है कि पिछले कुछ महीनो से जिला दर जिला भाजपा गुटबाजी का शिकार हो चली थी. आपस में ही नेता लड़ रहे थे. अगर बात की जाए तो सांसद और विधायकों में तलवारे खींची हुई थी.
एक समय तो प्रदेश समिति को हस्तक्षेप करना पड़ा था
प्रदेश समिति को हस्तक्षेप करना पड़ा था. गुटबाजी खत्म करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन क्या धनबाद में गुटबाजी पूरी तरह से खत्म हो गई है? ऐसा लग तो नहीं रहा है. धनबाद भाजपा की राजनीति फिलहाल दिलचस्प मोड़ पर खड़ी हैं. धनबाद में फिलहाल भाजपा के चार खेमे सक्रिय हैं. एक खेमा सांसद ढुल्लू महतो का है, दूसरा विधायक राज सिन्हा का है, तीसरा पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह का है . चौथ झरिया विधायक रागिनी सिंह का है. पूर्व में शेखर अग्रवाल का भी एक गुट चलता था, लेकिन वह अब झामुमो में चले गए हैं. एक बार फिर अब पांचवा गुट उभर कर सामने आया है. यह गुट कुंभ नाथ सिंह का बताया जाता है. इस वजह से पार्टी में नई हलचल पैदा हुई है.
धनबाद भाजपा में नए समीकरण बनने की सुगबुगाहट दिख रही है
धनबाद भाजपा में नए समीकरण बनने की सुगबुगाहट है. कुंभनाथ सिंह के साथ भी भाजपा के कार्यकर्ताओं को देखा जा रहा है. वह लगातार सक्रिय भी दिख रहे हैं. चाहे बाबूलाल मरांडी का स्वागत करना हो अथवा पशुपतिनाथ सिंह से मिलना अथवा किसी कार्यक्रम में पहुंचना, भीड़ उनके साथ दिखती है. गांधी जयंती के मौके पर वह धनबाद के पूर्व सांसद पी एन सिंह, महानगर भाजपा अध्यक्ष श्रवण राय और अन्य पदाधिकारी के साथ रणधीर वर्मा चौक स्थित खादी ग्रामोद्योग की दुकान पहुंचे थे. गांधी जयंती के अवसर पर सभी को शाल भेंट किया। विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, बावजूद इस तरह की गुटबाजी चर्चा में है. कुछ लोग इसे आगामी चुनाव की तैयारी के रूप में देख रहे हैं.
भाजपा के टिकट के लिए हमेशा खींचतान चलती रहती है
दरअसल, भाजपा के टिकट के लिए हमेशा खींचतान चलती रहती है. अगर कुंभनाथ सिंह प्रयास कर रहे हैं, तो निश्चित रूप से वह धनबाद विधानसभा के लिए ही कोशिश कर रहे होंगे? फिलहाल धनबाद विधानसभा से राज सिन्हा भाजपा के तीसरी बार के विधायक हैं. ऐसे में भाजपा की राजनीति फिलहाल दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है . यह अलग बात है कि अभी वक्त है और पार्टी के झारखंड प्रभारी और संगठन महामंत्री भी बदल दिए गए हैं. इनके ऊपर बड़ी जिम्मेवारी होगी, गुटबाजी को प्रश्रय देने वाले का भविष्य क्या होगा, यह कहना अभी मुश्किल है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को झारखंड में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी झारखंड में हाशिये पर चली गई थी.
