Jharkhand

झारखंड में कांग्रेस की राजनीति किस ओर? आदिवासी महाजुटान के बाद राजभवन मार्च का मतलब क्या

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD): झारखंड में कांग्रेस 7 सितंबर को राजभवन मार्च करने जा रही है.  बताया गया है कि चंदा चोरी और खनन विधेयक के खिलाफ कांग्रेस का यह मार्च होगा. झामुमो   इसमें शामिल होगा अथवा नहीं, यह अभी अधिकृत तौर पर स्पष्ट नहीं हुआ है.  लेकिन झारखंड में कांग्रेस की अचानक गतिविधियां बढ़ गई हैं.  कांग्रेस यह  साबित करने की कोशिश में है कि वह जनता के मुद्दे को लेकर सड़क पर है.  हो सकता है कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर ऐसा हो रहा हो.  

 अगर 7 सितंबर के राजभवन मार्च के साथ 30 अगस्त को हुए आदिवासी एकता महाजुटान  को एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो इसके कई राजनीतिक मतलब  निकलते है.  यह अलग बात है कि इस रैली में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नहीं गए, इस वजह से कांग्रेस को  पूरा मौका मिला।  रैली का नेतृत्व कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने किया था.  मंच पर प्रदेश कांग्रेस के बड़े चेहरे मौजूद रहे और राहुल गांधी का संदेश भी पढ़ा गया.  बताया जाता है कि मुख्यमंत्री तो कार्यक्रम में नहीं गए लेकिन झामुमो के एक विधायक मौजूद रहे.  सवाल उठता है कि यह  लड़ाई सिर्फ परिसीमन की है, अथवा इसकी आड़ में कांग्रेस आदिवासियों की राजनीति साधने की कोशिश कर रही है? 

कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के राजू ने रैली में बीजेपी और आरएसएस पर आदिवासी प्रतिनिधित्व कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया था.  कहा था कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ी रहेगी।  परिसीमन के खिलाफ इस महजुटान  में सिर्फ परिसीमन को ही मुद्दा नहीं बनाया गया.  यहां यह भी  जान लेना जरूरी है कि परिसीमन में झारखंड की अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीट  कितनी बदलेगी, यह अभी निश्चित नहीं है.  फिलहाल झारखंड में 28 अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीट  हैं और पांच लोकसभा की सीट  हैं.  झारखंड में कुल विधान सभा सीटों की संख्या फिलहाल 81  और लोकसभा सीटों की संख्या 14 है. तो क्या झारखंड में कांग्रेस खुद को आदिवासियों की आवाज बनने की कोशिश कर रही है? 

दरअसल, झारखंड में अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटें  ही सत्ता  का द्वार खोलती हैं.   इन सीटों पर जो अधिक कब्जा करता है, उसकी सरकार बनती है.  इसलिए हो सकता है कि कांग्रेस अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों की लड़ाई लड़ रही हो? झारखंड में आदिवासी राजनीति फिलहाल झामुमो  के पास है.  ऐसे में कांग्रेस यह  समझ रही है कि उसे अगर झारखंड में पैर जमाना है तो आदिवासियों के आंदोलन को  मुखर बनाना  होगा।  दरअसल, झारखंड में कांग्रेस अब एक नए सिरे से अपनी राजनीति मजबूत करने की कोशिश कर रही है.  यह  अलग बात है कि इसमें वह कितनी सफल होगी, यह  आने वाला वक्त बताएगा, क्योंकि महाजुटान  रैली में सिर्फ परिसीमन की ही बात नहीं हुई. आदिवासियों से जुड़े अन्य मुद्दों को भी उठाया गया था.