Jharkhand

सिंदरी से कैसे खुलेंगें झारखंड के अद्यौगिक विकास के द्वार, खाद कारखाने के खुलने से धनबाद को क्या होगा फ़ायदा?

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
सिंदरी से कैसे खुलेंगें झारखंड के अद्यौगिक विकास के द्वार, खाद कारखाने के खुलने से धनबाद को क्या होगा फ़ायदा?

धनबाद(DHANBAD): तो क्या झारखंड की फिर से एक बार किस्मत चमकेगी? क्या धनबाद का सिंदरी खाद कारखाना फिर से चालू होगा? आखिर क्यों बंद  खाद  कारखाने को चालू करने के लिए सुगबुगाहट  शुरू हो गई है.  दरअसल, रसायन और उर्वरक संबंधी स्थाई संसदीय समिति ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए झारखंड के सिंदरी खाद कारखाने को फिर से शुरू करने का सुझाव दिया है.  इसके साथ ही दुर्गापुर, हल्दिया और कोरबा के यूरिया फर्टिलाइजर प्लांट को भी शुरू करने को कहा गया है.  जानकारी के अनुसार सोमवार को लोकसभा में रसायन और उर्वरक संबंधी स्थाई समिति ने इससे  संबंधित रिपोर्ट पेश की.  समिति ने बताया कि देश  ने वित्तीय वर्ष 25 -26 के दौरान 100 लाख टन  से ज्यादा यूरिया का आयात किया है.  अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में इसकी डिमांड और बढ़ेगी। 

सिंदरी खाद कारखाना दिसंबर 2002 में स्थाई रूप से बंद हो गया था 
 
दरअसल, झारखंड का सिंदरी खाद कारखाना दिसंबर 2002 में स्थाई रूप से बंद घोषित कर दिया गया.  फिलहाल ज्वाइंट वेंचर में  सिंदरी में कारखाना चल रहा है.   सिंदरी खाद कारखाने  का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है. . बता दें कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की "स्वप्न सुंदरी" सिंदरी 1951 में शुरू होने के बाद किस्तों में मरती चली गई या किस्तों में मार दी गई.  दोनों बातें सच है, क्योंकि जिस तामझाम और जरूरत को पूरा करने के लिए सिंदरी खाद कारखाने का उद्घाटन पंडित नेहरू ने 1951 में किया था, उसे आगे के दिनों में मेंटेन नहीं किया गया और धीरे-धीरे अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, लालफीताशाही ,नेतागिरी की भेंट चढ गया  देश का प्रतिष्ठित सिंदरी खाद कारखाना.   यूं तो इसकी हालत एक दशक से भी अधिक समय से बिगड़ रही थी लेकिन अंततः दिसंबर 2002 में इस कारखाने को स्थाई रूप से बंद घोषित कर दिया गया.  

सिंदरी खाद कारखाना अपने आप में अद्भुत था 

यह  कारखाना अपने आप में अद्भुत था, इस कारखाने के पास अपनी रेल लाइन, अपना पोस्ट ऑफिस, अपना एयरपोर्ट सब कुछ था और देश के अन्य उद्योगों के लिए एक उदाहरण भी था लेकिन समय के साथ सरकार की निगाहें टेढ़ी होती  गई  और यह कारखाना हमेशा -हमेशा के लिए बंद हो गया.  जिस समय यह कारखाना बंद हुआ ,उस समय यहां कार्यरत कर्मचारियों की संख्या लगभग दो हजार से भी अधिक थी. कार्यरत कर्मचारियों को  वीआरएस दे दिया गया ,हालांकि इस कारखाने के बंदी के बाद खुलवाने के लिए जबरदस्त आंदोलन हुआ ,धरना -प्रदर्शन हुए, सिंदरी  से लेकर धनबाद तक ,धनबाद से लेकर दिल्ली तक आंदोलन हुए, प्रभावित कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों से भी गुहार की लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला और कारखाना बंद हो गया. 

लगातार बिगड़ती चली गई सिंदरी खाद कारखाने की सूरत

 जो कर्मचारी वीआरएस लेने के बाद भी सिंदरी  छोड़कर नहीं जाना चाहते थे ,उन्हें इकरारनामा के आधार पर जिन घरों में वह रह रहे थे ,आवंटित किया गया.  हालांकि उसके बाद भी उनकी समस्याएं कमी नहीं, समस्याएं बढ़ती रही.  कभी पानी का संकट तो कभी बिजली संकट तो कभी स्वास्थ्य की समस्याएं.  खाद कारखाने का बेहतरीन अस्पताल खंडहर में बदल गया, उस अस्पताल को न सरकार ने टेकओवर किया और ना चलाने की कभी मंशा जाहिर की.  नतीजा हुआ कि करोड़ों -अरबों की अत्याधुनिक मशीनें जंग की भेंट चढ़ गई. आज अगर आप खाद कारखाने के  आवास को देखेंगे तो आंख से आंसू छलक पड़ेंगे, क्योंकि आवासों की हालत देखकर ऐसा नहीं लगता कि  यही देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की "स्वप्न सुंदरी" सिंदरी है.   सब कुछ खत्म होने के बाद 2016  में केंद्र सरकार ने सुगबुगाहट शुरू की.  कोल इंडिया लिमिटेड, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड और एफसीआईएल को मिलाकर 15 जून 2016 को एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनाई गई, जिसका नाम दिया गया हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (हर्ल) , जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मई 2018  को किया.