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Jharkhand

आउटसोर्सिंग कंपनियों की बीसीसीएल में कैसे चल रही समानांतर व्यवस्था? पुलिस में महाप्रबंधक सहित अन्य के खिलाफ मुक़दमा दर्ज

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद (DHANBAD): बीसीसीएल में संचालित आउटसोर्सिंग कंपनियों की क्या अब समानांतर व्यवस्था चल रही है? किसकी सह पर वह एनआईटी के शर्तों का खुल्लम-खुल्ला डंके की चोट पर उल्लंघन कर रही हैं? क्या बीसीसीएल मैनेजमेंट का उन पर कोई कंट्रोल नहीं रह गया है? क्या अपनी सुविधा और लाभ के लिए कुछ भी करने की आउट सोर्स कंपनियों को छूट मिली हुई है? क्या किसी नदी की प्राकृतिक बहाव को भी वह बिना किसी के अनुमति के छेड़छाड़ कर सकती है? यह सब सवाल अब कोयलांचल में बड़ा आकार ले लिया है. यह तो गनीमत है कि सीओ के आवेदन पर ऐसा करने वालों के खिलाफ कतरास थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है. उसके बाद यह मामला चर्चा में आया है. 

30 साल पहले कतरी नदी की विभीषिका  कैसे देखा था धनबाद 
 
बीसीसीएल मैनेजमेंट भी सवालों के घेरे में है तो आर के माइनिंग आउटसोर्सिंग पर तो सीधे-सीधे नदी के प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है. मामला यह गंभीर है और अब पुलिस के पास पहुंच गया है. आज से लगभग 30 साल पहले कतरी नदी की विभीषिका को धनबाद में देखा है. कतरी नदी जब उफान पर आई तो 60 से अधिक कोयला श्रमिकों की जल समाधि हो गई थी. उसके बाद से कतरी  नदी के बहाव  से छेड़छाड़ करने की कोई सोच भी नहीं रहा था. लेकिन 2026 में एक बार फिर यह मामला सामने आया है. वैसे भी कतरी नदी के अगल-बगल कोयले के अवैध उत्खनन की वजह से कतरी नदी अब अपने पुराने स्वरूप में नहीं रह गई है. लेकिन जो भी उसका प्राकृतिक बहाव है, उससे छेड़छाड़ करने का बड़ा मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार कतरी नदी के प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ कर कच्चा पुल बनाने के मामले को लेकर शनिवार को कतरास थाने में प्राथमिक की दर्ज की गई है. 

आउट सोर्स कंपनी और बीसीसीएल के जीएम के खिलाफ केस 

इस मामले में आर के कोल माइनिंग के प्रोजेक्ट हेड, मैनेजर और सुपरवाइजर के अलावा बीसीसीएल-4 के महाप्रबंधक सहित अन्य पर आरोपी बनाया गया है. आरोप है कि कंपनी ने बगैर अनुमति के कतरी नदी में पाइप डालकर कच्चा पुल तैयार किया है. भारी वाहनों के आने-जाने के लिए नदी के किनारे मिट्टी की भराई भी की गई है. इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है. जानकारी के अनुसार बाघमारा के अंचल अधिकारी के आवेदन पर यह मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस अब इस मामले की जांच करेगी और आगे कार्रवाई करेगी. उल्लेखनीय है कि कतरी नदी के बहाव से छेड़छाड़ का मामला कतरास बचाओ संघर्ष समिति ने भी उठाया था. कई स्तरों पर इसकी शिकायत की गई थी. कतरी नदी की प्रकृति प्रवाह से छेड़छाड़ का दुष्परिणाम आगे चलकर कोयलांचल भुगत सकता है.