धनबाद (DHANBAD): धनबाद की सिंदरी तो 2002 के पहले वाली सिंदरी नहीं बन सकती, लेकिन उसका "भाग्य "बदलने का एक और प्रयास शुरू किया गया है. अब सिंदरी में कोयला गैसीकरण से बनने वाली सिन गैस यानी सिंथेटिक गैस से यूरिया उत्पादन की संभावना तलाशी जाएगी. जानकारी के अनुसार इसके लिए कोल इंडिया लिमिटेड और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड ने एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया है. इस परियोजना में कोयला गैसीकरण के जरिए तैयार सिन गैस का इस्तेमाल यूरिया उत्पादन में करने पर अध्ययन किया जाएगा. देश में कोयले का बड़ा भंडार है. सरकार इस घरेलू संसाधन का इस्तेमाल ऐसे उत्पादों के निर्माण में करना चाहती है, जिन्हें अभी बड़े स्तर पर विदेश से आयात करना पड़ता है.
केवल धनबाद ही नहीं, झारखंड को मिल सकती है बड़ी पहचान
अगर यह अध्ययन सच साबित हुआ तो सिंदरी में कोयला आधारित नए अमोनिया एवं यूरिया प्लांट के निर्माण से न केवल सिंदरी बल्कि पूरे झारखंड को नई औद्योगिक पहचान मिल सकती है. यह अलग बात है कि सिंदरी में अभी हर्ल कंपनी चल रही है. लेकिन सिंदरी खाद कारखाने वाली बात फिलहाल नहीं है. धनबाद की सिंदरी स्वतंत्रता के बाद से ही औद्योगिक नगरी के रूप में जानी जाती रही है, लेकिन उसके बाद उसकी स्थिति बिगड़ती गई. देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की "स्वप्न सुंदरी" सिंदरी 1951 में शुरू होने के बाद किस्तों में मरती चली गई या किस्तों में मार दी गई. दोनों बातें सच है, क्योंकि जिस तामझाम और जरूरत को पूरा करने के लिए सिंदरी खाद कारखाने का उद्घाटन पंडित नेहरू ने 1951 में किया था, उसे आगे के दिनों में मेंटेन नहीं किया गया और धीरे-धीरे अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, लालफीताशाही ,नेतागिरी की भेंट चढ गया.
सिंदरी खाद कारखाना अपने आप में अद्भुत था
देश का प्रतिष्ठित सिंदरी खाद कारखाना. यूं तो इसकी हालत एक दशक से भी अधिक समय से बिगड़ रही थी लेकिन अंततः दिसंबर 2002 में इस कारखाने को स्थाई रूप से बंद घोषित कर दिया गया. यह कारखाना अपने आप में अद्भुत था, इस कारखाने के पास अपनी रेल लाइन, अपना पोस्ट ऑफिस, अपना एयरपोर्ट सब कुछ था और देश के अन्य उद्योगों के लिए एक उदाहरण भी था, लेकिन समय के साथ सरकार की निगाहें टेढ़ी होती गई और यह कारखाना हमेशा-हमेशा के लिए बंद हो गया. जिस समय यह कारखाना बंद हुआ, उस समय यहां कार्यरत कर्मचारियों की संख्या लगभग दो हजार से भी अधिक थी. उन्हें वीआरएस दे दिया गया
सिंदरी खाद कारखाने को खुलवाने को बड़ा आंदोलन किया गया था
हालांकि इस कारखाने के बंदी के बाद खुलवाने के लिए जबरदस्त आंदोलन हुआ, धरना-प्रदर्शन हुए, सिंदरी से लेकर धनबाद तक, धनबाद से लेकर दिल्ली तक आंदोलन हुए, प्रभावित कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों से भी गुहार की लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला और कारखाना बंद हो गया, जो कर्मचारी वीआरएस लेने के बाद भी सिंदरी छोड़कर नहीं जाना चाहते थे, उन्हें इकरारनामा के आधार पर जिन घरों में वह रह रहे थे, आवंटित किया गया. हालांकि उसके बाद भी उनकी समस्याएं कमी नहीं, समस्याएं बढ़ती रही. 2016 में केंद्र सरकार ने सुगबुगाहट शुरू की. कोल इंडिया लिमिटेड, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड और एफसीआईएल को मिलाकर 15 जून 2016 को एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनाई गई, जिसका नाम दिया गया हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (हर्ल), जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मई 2018 को किया था. फिलहाल हर्ल में उत्पादन जारी है.
