धनबाद (DHANBAD): कतरास का बेकाबू सांड अब पारसनाथ के जंगलों में अपना ठिकाना खोज रहा है. कतरास के फुलारीटांड के लोग लंबे समय से इस "आतंकी" सांड का आतंक झेल रहे थे. सूचना के अनुसार जब सांड का आतंक सर चढ़कर बोलने लगा, लोगों को घायल करने लगा, तो परेशान लोगों ने कड़ी मेहनत कर उसे पर काबू पाया. पहले कई लोगों की हत्या करने के बाद सांड सूचना के मुताबिक सोमवार को दो युवकों को घायल कर दिया था. उसके बाद ग्रामीणों का धैर्य टूट गया. लोग लाठी -डंडा लेकर सांड की तलाश में जुट गए. फुलारी टांड जंगल और आसपास के इलाके की घेराबंदी कर उसे खोजा जाने लगा. मंगलवार को मिलने पर उसे खदेड़ कर खटाल की ओर ले जाया गया.
गौशाला ने इंकार किया तो पारसनाथ जंगल में छोड़ा गया सांड
इसके बाद कड़ी मेहनत के बाद उस पर काबू पा लिया गया. इस दौरान ग्रामीणों को हल्की चोट भी आई है. हालांकि रिपोर्ट में बताया गया है कि सांड को बाद में पारस नाथ क्षेत्र के जंगल में छोड़ दिया गया है. सूचना के मुताबिक सोमवार को सांड के हमले से दो युवक घायल हो गए थे. बताया गया है कि सांड ने एक युवक को पटक कर दबा दिया था. आसपास के मौजूद लोगों ने किसी तरह उस युवक की जान बचाई. उसके बाद सांड को पकड़ने का निर्णय लिया गया. इसके बाद दर्जनों लोग जंगल और आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश में जुट गये.
ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई, तब आया पकड़ में
काफी मेहनत के बाद सांड को खटाल की ओर भेज कर रस्सी से बांधा गया. ग्रामीण बताते हैं कि सांड के हमले से पहले कई लोग घायल हो चुके हैं. 4 सितंबर को बेनीडीह निवासी एक बुजुर्ग की सांड ने जान ले ली थी. इसके पहले भी एक व्यक्ति की सांड के हमले में मौत हो चुकी थी. सांड को पकड़ने के बाद ग्रामीण उसे कतरास गौशाला ले गए. हालांकि उसके आक्रामक व्यवहार को देखते हुए गौशाला प्रबंधन ने उसे रखने से इनकार कर दिया था. इसके बाद ग्रामीणों की बैठक हुई. ग्रामीणों ने आपसी सहमति से सांड को पारसनाथ क्षेत्र के जंगल में ले जाकर छोड़ दिया. सांड के पकड़े जाने के बाद फुलारी टांड और आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली है.
