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Jharkhand

उम्र के तीसरे पड़ाव पर पहुंच गए हैं गैंगस्टर फहीम खान, अनिल शर्मा, सुरेंद्र बंगाली, कभी चलता था सिक्का,आज मांग रहे रिहाई

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD):  वैसे तो ,झारखंड सरकार की सजा पुनरीक्षण कमेटी ने 53 कैदियों को समय से पहले रिहा करने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है .  लेकिन इनमें तीन कुख्यात गैंगस्टर की चर्चा खूब हो रही है.  वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान, कुख्यात  अनिल शर्मा और सुरेंद्र बंगाली की खूब चर्चा हो रही है.  बताया जाता है कि यह तीनों पिछले  कई सालों से जेल में बंद हैं  और आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं.  तीनों की उम्र फिलहाल 65 से 70 के बीच पहुंच गई है.  एक समय उनकी तूती बोलती थी.  समय चाहे बिहार का रहा हो या झारखंड का, इनके  अपराध के इतिहास की लंबी चौड़ी फेहरिश्त  है.  

फहीम खान फिलहाल घाघीडीह जेल में आजीवन कारावास का सजा काट रहा 

फहीम खान पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और अपहरण जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं.  फिलहाल वह जमशेदपुर के घाघीडीह  जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है.  इसी तरह अनिल शर्मा की पहचान रांची और आसपास के इलाकों में एक खूंखार गैंगस्टर की रही है.  अनिल शर्मा पर हत्या और  रंगदारी के दर्जनों मामले दर्ज हैं.  उसे भी  हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी और वह फिलहाल कई सालों से जेल में बंद है.  जानकारी के अनुसार फिलहाल वह हजारीबाग जेल में बंद है.  

सुरेंद्र बंगाली क असली नाम सुरेंद्र सिंह रौतेला है,रांची का आंतक रहा है 

सुरेंद्र बंगाली के बारे में बताया जाता है कि उसका असली नाम सुरेंद्र सिंह रौतेला है.  रांची का एक समय में सबसे बड़ा आतंक और कुख्यात अपराधी था.  लोग बताते हैं कि रांची के कोतवाली क्षेत्र में हुई एक हत्या के मामले में वह उम्र कैद की सजा काट रहा है.  जानकारी के अनुसार कुख्यात अपराधी अनिल शर्मा साल 1999 में रांची के बिरसा मुंडा जेल में बंद रहते हुए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कुख्यात भोमा  सिंह की हत्या कर दी थी.  इस घटना के बाद भोमा   सिंह के  भाई के बयान पर हत्या का मामला दर्ज हुआ था.  ट्रायल के बाद कोर्ट ने अनिल शर्मा को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. 
 
90 के दशक में सुरेंद्र बंगाली और अनिल शर्मा का रांची में सिक्का चलता था

सुरेंद्र बंगाली के बारे में बताया जाता है कि सुरेंद्र सिंह रौतेला जब अपराध की दुनिया में कदम रखा, तो वह बंगाली के नाम से जाना  जाने लगा.  शुरुआत में वह शहर के पुराने और स्थापित गैंगस्टर से नजदीकी बढ़ता , पहले वह गैंग के बड़े सदस्यों  का विश्वास जितना था और बाद में उन्हें रास्ते से हटा देता था.  इसी रणनीति से उसने धीरे-धीरे रांची में अपना स्वतंत्र बंगाली गैंग खड़ा कर लिया।  90 के दशक में सुरेंद्र बंगाली और अनिल शर्मा का रांची में सिक्का चलता था.  कारोबारी और आम लोग खौफ के साए में जीते थे.  फहीम खान तो वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर रहा है.  उसके और उसके परिवार पर  तो "गैंग्स ऑफ़ वासेपुर" फिल्म भी बनी। उसके खिलाफ भी कई मामले दर्ज हैं.  जानकारी के अनुसार 1989 में वासेपुर में सागीर  हसन सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. ऐसी मामले में वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. 

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