Jharkhand

झारखंड बनने के पहले धनबाद के टुंडी में भी मिसिर बेसरा दस्ते ने खेला था बड़ा खूनी खेल, जानिए कैसे बची थी मंत्री का जान

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD): ईनामी  नक्सली मिसिर  बेसरा के दस्ते ने बिहार से अलग होकर झारखंड बनने के कुछ दिन पहले ही धनबाद के टुंडी में भी बड़ा खूनी खेल खेला था.  इस हमले में बिहार सरकार के मंत्री डॉक्टर सबा  अहमद तो बच गए थे, लेकिन चार जवानों की हत्या हो गई थी.  जवानों के हथियार लूट लिए गए थे.  उस समय यह दस्ता काफी सक्रिय था.  लोग बताते हैं कि यह हमला बहुत ही सुनियोजित ढंग से की गई थी.  मंत्री को सब कुछ छोड़कर दूसरे की साइकिल से भागना पड़ा था, तब जाकर उनकी जान बची थी.  यह  घटना हुई थी 29 अक्टूबर 2000 को. डॉक्टर सबा अहमद का निधन हो गया है. 

केंदुआटांड  फुटबॉल मैदान में हुई थी घटना 

जानकार बताते हैं कि   पूर्वी टुंडी के केंदुआटांड  फुटबॉल मैदान में फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला चल रहा था. बतौर मुख्य अतिथि बिहार के  कारा मंत्री डॉक्टर सबा सभा में शामिल हुए थे. उनके साथ कम से कम आधा दर्जन बिहार पुलिस के जवान और एक बॉडीगार्ड थे. फाइनल मैच जब खत्म हो गया, तो मंच के चारों ओर भीड़ जुट गई. कुछ ही समय बाद पुरस्कार वितरण होने वाला था. अचानक मैदान में गोलीबारी शुरू हो गई और लोग इधर-उधर भागने लगे. गोलियां चलने लगी तो डॉक्टर सबा अहमद किसी की साइकिल पर सवार होकर भागकर लटानी मोड़ पहुंचे और वहां से धनबाद आए. 

मिनटों में हजारों की संख्या का मैदान पूरी तरह से खाली हो गया

मिनटों में हजारों की संख्या का मैदान पूरी तरह से खाली हो गया. पूरे मैदान में सिर्फ चार लाशें पड़ी हुई थी. उनमें तीन बिहार पुलिस के जवान और एक उनके बॉडीगार्ड की लाश थी. सभी मारे गए थे और नक्सली हथियार लूट ले गए थे. लोग बताते हैं कि नक्सली सादे लिबास में मैदान में पहुंचे थे, इसलिए कोई उन्हें पहचान नहीं पाया था. यह घटना नक्सली घटना थी और लोगों को मारने के बाद सभी हथियार लूट कर पहाड़ की ओर चले गए. इस घटना ने इलाके को झकझोर दिया था. बिहार सरकार के सामने भी बड़ी चुनौती पेश की थी. डॉक्टर सबा अहमद विनोद बाबू के संपर्क में आने के बाद  राजनीति में आए और तीन बार टुंडी से विधायक रहे. बिहार में  मंत्री भी रहे. उनके पिता इम्तियाज अहमद सांसद रह चुके थे. वह एफआरसीएस भी थे. 1992 में झामुमो के टिकट पर टुंडी से विधायक बने थे. 1995 में झारखंड मुक्ति मोर्चा मार्डी गुट से विधायक बने थे,जबकि 2000 में राजद से विधायक बने थे.

31  अक्टूबर 2001 को  धनबाद के तोपचांची में क्या हुआ था 

31  अक्टूबर 2001 में धनबाद के तोपचांची में 13 जैप  जवानों की निर्मम हत्या के मामले में भी इस दस्ते का  नाम आया था.  इस हत्याकांड में तेरह  जवानों की हत्या कर हथियार लूट लिए गए थे.  यह  घटना बड़ी घटना थी और बड़े  ही शातिराना  अंदाज में इस घटना को  अंजाम दिया गया था.  बताया जाता है कि अक्टूबर 2001 में तोपचांची  प्रखंड कार्यालय में जवान ठहरे हुए थे.  उस समय तोपचांची  उग्रवाद प्रभावित इलाका था.  जवानों की प्रतिनियुक्ति की गई थी.  कहा जाता है कि खरीदार के भेष में बुधनी हटिया पहुंचा उग्रवादियों का दस्ता सीधे जवानों के बैरक में घुस गया और आराम कर रहे जवानों को बिना कुछ समय दिए उनकी हत्या कर दी.  यह हत्या  तेज धारदार हथियार से की गई थी.  हत्या करने के बाद जवानों के हथियार लूट लिए गए थे और तोपचांची  प्रखंड कार्यालय के पीछे से नक्सलियों का दस्ता फरार हो गया था.