धनबाद(DHANBAD): धनबाद में सड़क जाम की वजह से कब आपकी ट्रेन छूट जाए, एंबुलेंस में कब आपकी जान चली जाए, आधे घंटे के रास्ते को पार करने में आपको 5 घंटा लग जाए यह कोई नहीं जनता. कोयलांचल की सड़कों पर वाहनों का बड़ा दबाव है. सड़क वही है, लेकिन वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ गई है. नतीजा है कि हर क्षेत्र में जाम की समस्या पैदा हो जाती है. कुछ इलाके तो ऐसे हैं, जहां लोग बहुत जरूरी काम पड़ने पर ही जाने की सोचते हैं.
यह परेशानी एक दिन की नहीं है, रोज की यही समस्या है. गोविंदपुर में एलिवेटेड फ्लाईओवर के लिए लगातार कई दिनों तक जाम की स्थिति रहती है, तो शहरी इलाके भी इससे अछूते नहीं हैं. झरिया हो, कतरास हो, धनबाद हो, निरसा हो, सब जगह जाम की समस्या एक ही तरह रहती है. जनप्रतिनिधियों के लिए भी असहज स्थिति उस समय उत्पन्न हो जाती है, जब उनकी गाड़ियां जाम में फंस जाती है. मंगलवार की रात केंदुआडी में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला. धनबाद के मेयर संजीव सिंह खुद ट्रैफिक सिपाही बन गए और घंटो बीच सड़क पर अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ खड़े होकर ट्रैफिक को नियंत्रित किया.
सड़क जाम को हटवाया, ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है. जानकार बताते हैं कि कुछ साल पहले गोविंदपुर में जब भयंकर जाम लगा था, तो धनबाद विधायक राज सिंहा ट्रैफिक सिपाही की भूमिका में आए थे और ट्रेफिक क्लियर कराया था. यह अलग बात है कि ट्रैफिक सुधार के नियम बनते हैं, लेकिन जमीन पर वह दिखता नहीं है. जाम की समस्या से लोगों को रोज दो-चार होना पड़ता है. सड़क पर अतिक्रमण भी इसका एक बड़ा कारण है. निगम अथवा प्रशासन जब अतिक्रमण हटाने लगता है, तो राजनीति शुरू हो जाती है. नतीजा होता है कि आधे -अधूरे मन से प्रशासन या निगम भी काम करता है. दरअसल, जरूरत है सबको साथ मिल- बैठकर एक ठोस योजना बनाने की, तभी धनबाद को कुछ राहत मिल सकती है.
