TNP DESK- बंगाल के कलाकारों ने इस दुर्गा पूजा कोयलांचल में अपनी कारीगरी का खूब जौहर दिखाया. दो-तीन महीने पहले से धनबाद में जमे रहे और एक से एक आकर्षक पंडाल बनाकर लोगों को आकर्षित किया. विद्युत सज्जा लाजवाब रही, अंधेरा होते ही दुधिया रोशनी से पूरा कोयलांचल कम से कम 5 दिनों तक नहाता रहा. इस बार पूजा पंडाल में भीड़ भी खूब दिखी. बाजार में बोनस के पैसे का असर भी दिखा. बाजार में पैसे भी खूब बरसे. दुर्गा पूजा पंडालों की भव्यता में बंगाल, झारखंड और बिहार का दिखा अनोखा अंदाज, कहीं मंदिर तो कहीं महल की झलक दिखी. धनबाद के जीयन एस हाई स्कूल मैदान में 155 फीट ऊंचा थाईलैंड के अरुण मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल रहा खास आकर्षण का केंद्र रहा. 50 लाख रुपये की लागत से हुआ था तैयार. दुर्गा पूजा संपन्न हो चुकी है, लेकिन इस बार बने भव्य पूजा पंडालों की खूबसूरती और अनोखी कलाकृतियां लोगों के जेहन में अब भी ताजा हैं. कहीं विदेश के प्रसिद्ध मंदिरों की झलक देखने को मिली, तो कहीं भारतीय संस्कृति, इतिहास और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम नजर आया. पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में पूजा समितियों ने पंडालों को आकर्षक बनाने के लिए जमकर मेहनत की. इन पंडालों को तैयार करने में सैकड़ों कारीगरों और मजदूरों ने दिन-रात काम किया.
धनबाद में दुर्गा पूजा की भव्यता आंखों से नहीं हो रही थी ओझल
इस बार धनबाद में भी दुर्गा पूजा की भव्यता देखने को मिली. जिले में छोटे-बड़े करीब 350 पूजा पंडाल बनाए गए. पूजा समितियों के अनुसार, इन आयोजनों पर कुल मिलाकर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए. वहीं, पश्चिम बंगाल में विशाल पंडालों और आकर्षक सजावट के साथ करोड़ों रुपये के आभूषणों से सजी मां दुर्गा की प्रतिमाएं चर्चा में रहीं. बिहार में भी देश-विदेश के प्रसिद्ध मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों की तर्ज पर पंडाल बनाए गए.धनबाद के जीएनएस हाई स्कूल मैदान में थाईलैंड के प्रसिद्ध अरुण मंदिर की तर्ज पर बना पंडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा. करीब 155 फीट ऊंचे और 140 फीट चौड़े इस पंडाल को तैयार करने में लगभग 50 लाख रुपये खर्च किए गए. इसकी भव्य संरचना, बारीक कारीगरी और आकर्षक रोशनी ने लोगों का ध्यान खींचा.झारखंड मैदान में आदिवासी संस्कृति से प्रेरित शीश महल की थीम पर पंडाल बनाया गया था.
सजावट में झारखंड की संस्कृति और परंपराओं को भी परोसा गया
इसकी सजावट में झारखंड की संस्कृति और परंपराओं को दिखाने का प्रयास किया गया. इसे तैयार करने में करीब 35 लाख रुपये खर्च हुए.धनसार स्थित लक्ष्मी नारायण विद्या मंदिर परिसर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला पंडाल बनाया गया. इसकी खासियत एक लाख से अधिक जीवित और औषधीय पौधों का इस्तेमाल बताया गया. हरियाली से सजे इस पंडाल को देखने के लिए लोग पहुंचे. इसे बनाने में करीब 18 लाख रुपये खर्च हुए.कतरास के रानी बाजार में भाव मयूर पैलेस की थीम पर पंडाल बनाया गया, जिस पर लगभग 25 लाख रुपये खर्च हुए. वहीं, स्टील गेट सरायढेला में तीन विशाल मोरों के साथ पारंपरिक ग्रामीण परिवेश और आदिवासी जीवनशैली की झलक दिखाई गई. इस पंडाल की लागत करीब 20 लाख रुपये बताई गई.भूली के ए, बी, सी और डी ब्लॉक में भी आकर्षक पंडाल बनाए गए. चारों ब्लॉक के पंडालों पर मिलाकर लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए गए. मनईटांड़ में नवयुवक संघर्ष समिति की ओर से समुद्र मंथन प्रसंग पर आधारित भव्य झांकी तैयार की गई, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया.
बिहार में मंदिरों और आधुनिक इमारतों की दिखी झलक
बिहार में भी दुर्गा पूजा के दौरान कई आकर्षक पंडाल बनाए गए. पटना, गोपालगंज और मुंगेर में तैयार पंडाल अपनी अलग-अलग थीम के कारण चर्चा में रहे.
पटना के इतवारपुर-कुरथौल में ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल बनाया गया. करीब 121 फीट ऊंचे और 120 फीट चौड़े इस पंडाल को तैयार करने में लगभग डेढ़ महीने का समय लगा. स्थानीय समिति से मिली जानकारी के अनुसार, इसकी लागत करीब एक करोड़ रुपये थी.गोपालगंज के राजा दल में अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर की प्रतिकृति तैयार की गई. इसकी भव्य बनावट और मंदिर जैसी सजावट लोगों के आकर्षण का केंद्र रही. इस पंडाल पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई.पटना के डाक बंगला चौराहे पर मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाया गया. इसकी खासियत हुगली के पत्तों से तैयार की गई सजावट थी. करीब 80 फीट ऊंचे और 55 फीट चौड़े इस पंडाल में प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया गया.वहीं, मुंगेर में मलेशिया के प्रसिद्ध पेट्रोनास ट्विन टावर्स की तर्ज पर आधुनिक पंडाल बनाया गया. ट्विन टावर की आकृति वाले इस पंडाल पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई.
पश्चिम बंगाल में करोड़ों की लागत वाले पंडालों की धूम
पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा अपनी भव्यता, कलात्मक सजावट और अनोखी थीम के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. इस बार भी कई पूजा समितियों ने विशाल पंडाल तैयार किए. कहीं विदेशी मंदिरों की प्रतिकृति बनाई गई, तो कहीं आधुनिक लाइटिंग और डिजिटल तकनीक से श्रद्धालुओं को आकर्षित किया गया.
नदिया जिले के कल्याणी आईटीआई मोड़ पर म्यांमार के प्रसिद्ध श्वेदागोन पगोडा से प्रेरित पंडाल तैयार किया गया. इसकी ऊंचाई करीब 200 फीट बताई गई. पंडाल के निर्माण में एक लाख से अधिक बांस के डंडों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई. अंदर की सजावट और रोशनी से पूरा परिसर भव्य दिखाई दे रहा था. इस पंडाल की लागत करीब 15 करोड़ रुपये बताई गई.
बंगाल में तो पूजा के क्या कहने
उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित सेंट्रल कॉलोनी में भी भव्य मंदिरनुमा पंडाल बनाया गया. यहां मां दुर्गा और उनके परिवार की प्रतिमाओं को सोने के आभूषणों से सजाया गया था. सोने के गहनों से सजी प्रतिमाएं पूजा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहीं.कोलकाता के लेकटाउन स्थित श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब में राजस्थान के जयपुर स्थित ऐतिहासिक हवा महल की तर्ज पर पंडाल बनाया गया. इसकी बनावट और राजसी रूप ने लोगों का ध्यान खींचा.वहीं, मध्य कोलकाता के संतोष मित्रा स्क्वायर में स्वतंत्रता संग्राम से प्रेरित 'वंदे मातरम' थीम पर पंडाल बनाया गया. यहां थ्री-डी तकनीक, लेजर और लाइट शो के जरिए इतिहास और आधुनिक तकनीक का संगम दिखाया गया. इस पंडाल की अनुमानित लागत करीब तीन करोड़ रुपये बताई गई.
आस्था के साथ कला और संस्कृति का संगम
दुर्गा पूजा के पंडाल केवल मां दुर्गा की आराधना के केंद्र नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कला, संस्कृति, इतिहास और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी लोगों तक पहुंचाया. धनबाद में झारखंडी संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिखा, बिहार में प्रसिद्ध मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों की झलक देखने को मिली, जबकि पश्चिम बंगाल में विशाल संरचनाओं, आकर्षक रोशनी और महंगे आभूषणों ने लोगों को आकर्षित किया.तीनों राज्यों के पंडालों की अपनी अलग विशेषता रही. इनकी भव्यता ने एक बार फिर दिखाया कि दुर्गा पूजा धार्मिक आस्था के साथ-साथ कारीगरों की कला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का भी बड़ा अवसर है.
