धनबाद(DHANBAD): धनबाद सीबीआई ने 20 साल बाद धनबाद एसबीआई, मुख्य शाखा में हुए कटे-फटे नोट के बहुचर्चित घोटाले के फरार दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस पूरे घोटाले के मुख्य आरोपी करतार सिंह और ब्रजभूषण प्रसाद बताए गए थे. आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी थे. 25-25 हजार रुपए के इनाम भी थे. 2005 में दर्ज इस बहुचर्चित मामले में पुराने नोटों का कारोबार करने वाले ब्रजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र से और करतार सिंह को छत्तीसगढ़ से सीबीआई ने गिरफ्तार किया। दरअसल, सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने नाम बदलकर रह रहे दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए ठोस योजना बनाई। घोटाले के बाद जब जांच शुरू हुई तो दोनों नेपाल भाग गए थे. नेपाल में होटल बिजनेस करने के बाद दोनों लौटे। दोनों पहले महाराष्ट्र के शिरडी आए, इसके बाद करतार सिंह रायपुर आ गया और वहां ज्योतिष बनकर डॉक्टर के एस सुथरा बनकर ज्योतिषाचार्य के रूप में अपनी दुकान चलाने लगा.
बृजभूषण प्रसाद कोपरगांव में मार्केट कंपलेक्स बना लिया था
जबकि बृजभूषण प्रसाद कोपरगांव में मार्केट कंपलेक्स बनाकर कमाई कर रहा था. सूत्र बताते हैं कि एलपीजी के कनेक्शन और उनकी पत्नियों के नाम की मदद से सीबीआई को गिरफ्तारी में सफलता मिली। उल्लेखनीय है कि धनबाद एसबीआई के मुख्य शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 तक अजूबा घोटाला हुआ था. बैंक के इतिहास में शायद यह पहला मामला होगा. इस घोटाले में जले कटे नोट लोगों से प्राप्त कर बैंक को सौंपने वाले कमीशन एजेंट और बैंक के अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे. दरअसल, एसबीआई कटे फटे नोटों को इकट्ठा कर रिजर्व बैंक भेजता था. जिससे कि उनका डिस्पोजल किया जा सके. इसी प्रक्रिया का घोटालेबाजों ने फायदा उठाया. धनबाद चेस्ट करेंसी के अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से ब्रजभूषण प्रसाद और करतार सिंह ने बड़ा घोटाला कर दिया. नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच धनबाद एसबीआई में ब्रांच से रिजर्व बैंक को लगभग 17 करोड रुपए के जले कटे नोटों की गड्डियां भेजी गई थी. रिजर्व बैंक में जांच के दौरान पता चला कि इनमें सैकड़ो गड्डियों के ऊपर और नीचे तो असली जले कटे नोट थे. लेकिन बीच के नोटों की जगह अखबार के कतरन और रद्दी कागजों को नोट के आकार में काटकर गड्डियों में भर दिया गया था.
1, 25 , 47,950 के नोट की जगह रद्दी कागज मिले थे
जांच में 1, 25 , 47,950 के नोट की जगह रद्दी कागज मिले. फिर खेप को वापस कर दी गई. तब इस घोटाले का खुलासा हुआ और फिर सीबीआई जांच शुरू हुई. बताया गया है कि सीबीआई ने ब्रजभूषण प्रसाद और करतार सिंह को 21 जून,2006 को गिरफ्तार किया . घोटाले की बात सामने आने के बाद सीबीआई ने 31. 8. 2005 को केस दर्ज किया था. यह कैसे 1, 25 , 47,950 रुपए की गड़बड़ी का हुआ था. यह घोटाला 2002 से 2005 तक की गई थी. सीबीआई ने बैंक के दो अधिकारियों, पांच कर्मचारियों के साथ ब्रजभूषण प्रसाद और करतार सिंह को नामजद किया था. प्राथमिक की दर्ज होते ही बैंक कर्मियों को निलंबित कर दिया गया और कुछ को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया. वहीं ब्रजभूषण प्रसाद और करतार सिंह रातों-रात देश छोड़कर भाग गए. बाद में सीबीआई ने दोनों के खिलाफ इनाम घोषित किया. फिर इंटरपोल की मदद से रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कराया था.
