Jharkhand

कतरास -झरिया में लगातार धंसान की घटनाएं: विधायक शत्रुघ्न महतो -रागिनी सिंह जनता को क्या देंगें भरोसा?

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD): कतरास और झरिया की स्थिति ऐसी हो गई है कि एक जगह गोफ भराई   हो नहीं पा रही कि  दूसरी जगह गोफ  बन जा रहा है. एक जगह के धंसान  प्रभावित लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट नहीं किये  जा पा रहे कि  फिर धंसान  की घटना हो जा रही है.  धनबाद के दो विधायक शत्रुघ्न महतो  और रागिनी सिंह के लिए भी धंसान  की घटनाएं चुनौती हैं.  दोनों भाजपा के विधायक हैं और दोनों के इलाके में ताबड़तोड़ धंसान  की घटनाएं हो रही हैं.  कतरास क्षेत्र के चैतुडीह , कैलुडीह  और काजू बागान में लगतार  हुई भू-धंसान  की घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. 

 चैतुडीह  में 20 फीट गहरे गोफ  में गिरी भैंस को बचा लिया गया है.  यह  भैंस किस्मत वाली निकली अन्यथा अब तक गोफ  में जो जीवन समाया  था, उसे जीवित निकाला नहीं जा सका था.  इधर, कतरास थाना क्षेत्र के काजू बागान में सोमवार को एक बार फिर जमीन धंसने  और गोफ  का दायरा बढ़ने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.  यहां 5 दिनों में  दूसरी बार जमीन धंसने  की घटना हुई है.  फिलहाल कोयलांचल में लगातार बारिश हो रही है.  इधर, झरिया क्षेत्र के लिलोरी पथरा में भी खौफ का माहौल है. 

 रविवार को यहां अचानक भू-धंसान  की घटना घटी थी.  जिससे  एक बड़ा गोफ  बन गया था.  विधायक रागिनी सिंह ने इलाके का दौरा किया है और अधिकारियों से बातचीत की है.  लोदना  एरिया के महाप्रबंधक और एजेंट को मौके पर बुलाकर उन्होंने फटकार भी लगाई है.  दरअसल, जहां गोफ  बन रहे हैं, गैस रिसाव हो रहा हैं.  यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि छाताबाद में भू-धंसान  के बाद खूब राजनीति हुई.  सांसद भी पहुंचे, कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचा, झामुमो  के नेता भी पहुंचे, इलाके के सर्वे कराने  की बात पर प्रभावित लोगों का आंदोलन खत्म हुआ.  लेकिन क्या सचमुच कतरास का इलाका खोखला हो गया है? क्योंकि लगातार घटनाएं हो रही है.  भू -धंसान  और गोफ  की घटनाओं में कोयलांचल में कई लोगों की जाने जा चुकी है.  

अगर आंकड़े पर गौर किया जाए तो 106  साल से इंतजार करते-करते  सुलगती भूमिगत आग,अब "धधकने" लगी है.1919 में झरिया के भौरा में भूमिगत आग का पता चला था.यह भूमिगत आग अब "कातिल" हो गई है. वैसे पिछले कई  सालों से वह संकेत दे रही है कि हालात बिगड़ने वाले हैं. लेकिन जमीन पर ठोस काम करने के बजाए हवाबाजी होती रही. इधर ,अवैध उत्खनन आग में घी का काम किया है. नतीजा सामने है.  भूमिगत  आग 1995 से ही संकेत दे रही है कि अब उसकी अनदेखी खतरनाक होगी. 

1995 में झरिया चौथाई कुल्ही में पानी भरने जाने के दौरान युवती जमींदोज हो गई थी. 24 मई 2017 को इंदिरा चौक के पास बबलू खान और उसका बेटा रहीम जमीन में समा गए थे. इस घटना ने भी रांची से लेकर दिल्ली तक शोर मचाया ,लेकिन परिणाम निकला शून्य बटा सन्नाटा. 2006 में शिमला बहाल में खाना खा रही  महिला जमीन में समा गई थी. 2020 में इंडस्ट्रीज कोलियरी में शौच के लिए जा रही महिला जमींदोज हो गई थी. फिर   28 जुलाई 2023 को घनुड़ीह का रहने वाला परमेश्वर चौहान गोफ में चला गया .पहले तो बीसीसीएल प्रबंधन घटना से इंकार करता रहा लेकिन जब मांस जलने की दुर्गंध बाहर आने लगी तो झरिया सीओ की पहल पर NDRF की टीम को बुलाया गया.  टीम ने कड़ी मेहनत कर 210 डिग्री तापमान के बीच से परमेश्वर चौहान के शव का अवशेष निकाला. शायद यह धनबाद कोयलांचल में गोफ में गिरे या समाए लोगों के शव का अवशेष निकालने का पहला मामला था.