Jharkhand

Coal World: देश के पहले कोल वाशरी का मुद्रीकरण धनबाद के बीसीसीएल के खाते में, क्या होंगे फायदे

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD):झारखंड देश के कोयला उत्पादन का रीढ़ है. पूरे देश को जरूरी कोकिंग कोल का 90 प्रतिशत कोयला झारखण्ड से उत्पादित होता है. इधर ,कोयला क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय हुआ है.  कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल ने 2.0 मिलियन टन प्रति वर्ष  क्षमता वाली दुग्धा कोल्  वाशरी  को जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड को हस्तांतरित कर दिया है.  बीसीसीएल मुख्यालय में यह  प्रक्रिया पूरी की गई.  

देश में किसी कोलवाशरी के मोनेटाइजेशन का पहला मामला

यह देश में किसी कोलवाशरी के मोनेटाइजेशन का पहला मामला है.  कोयला मंत्रालय की पहल  पर कोयला क्षेत्र के आधुनिकीकरण और परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है.  अब निजी क्षेत्र की भागीदारी से कोयला धुलाई  में को बढ़ावा मिलेगा.  इससे बेहतर गुणवत्ता वाले धुले  कोकिंग कोयले की उपलब्धता बढ़ेगी।  सूत्रों के अनुसार यह मिशन कोकिंग कोल के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है .  साथ ही आयातित  कोकिंग कोल्   पर निर्भरता कम करने में भी मदद करेगी.  घरेलू इस्पात उद्योग को मजबूती मिल सकती है. 

बीसीसीएल -सेल के बीच  हुई है गंभीर मंत्रणा 

 इधर, जानकारी के अनुसार बीसीसीएल के सीएमडी  ने नई दिल्ली में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक से मुलाकात भी की है.  दोनों सार्वजनिक उपक्रमों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ बनाने तथा घरेलू इस्पात उद्योग की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुसार सहयोग मजबूत करने पर दोनों अधिकारियों ने चर्चा की.  बता दें कि बीसीसीएल स्वदेशी कोकिंग  कोल्  की आपूर्ति के माध्यम से सेल सहित देश के इस्पात उद्योगों की आवश्यकताओं की पूर्ति में बड़ी भूमिका निभा रही है.   उल्लेखनीय है कि कोकिंग  कोल्  के उत्पादन का आधा से अधिक हिस्सा बीसीसीएल उत्पादित करता  है.  घरेलू कोकिंग कोल्  के  उत्पादन का लगभग 90%  झारखंड से होता है.