धनबाद(DHANBAD): धनबाद में संचालित कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई बीसीसीएल चालू वित्तीय वर्ष के दूसरी तिमाही में शानदार वापसी की है. कुल 123.74 करोड रुपए का मुनाफा हुआ है. पिछले वित्तीय वर्ष कि इस अवधि में कंपनी को नुकसान हुआ था. दरअसल, कोयला उद्योग में अभी "जीरो कोल् लीकेज पॉलिसी" लागू है. सीआईएसएफ को खनिज अधिनियम -1957 के तहत कार्रवाई करने को अधिकृत कर दिया गया है. इससे अब उन्हें अदालत में मामले दर्ज कराने , अवैध कोयला भंडारण के संदेह वाले स्थान में प्रवेश करने, तलाशी और जब्ती अभियान चलाने, अवैध रूप से निकाले गए कोयले के साथ-साथ उपकरणों और वाहनों को जब्त करने का अधिकार प्राप्त हो गया है. सीआईएसएफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है. कोयला लीकेज पॉलिसी का असर कोयला कंपनियों की आर्थिक सेहत पर दिख रहा है.
जीरो कोल लीकेज पॉलिसी से परेशां है कोयला सिंडिकेट
दूसरी ओर अवैध कोयला सिंडिकेट में तेज हलचल है. बिना पूंजी पगहा के लाखों -करोड़ों में खेलने वालों के सामने परेशानी पैदा हो गई है. सीआईएसएफ ने कार्रवाई तेज कर दी है और अत्याधुनिक तकनीक से कोयला चोरी पर हथौड़ा चलाया जा रहा है. इधर, सूत्रों के अनुसार जीरो कोल् लीकेज पॉलिसी लागू होने के बाद अवैध कोयले का सिंडिकेट सीआईएसएफ एक्शन की रफ़्तार को ढीला कराने को सक्रिय हो गया है. सूत्रों के अनुसार चतरा से लेकर बोकारो-बेरमो , बोकारो से लेकर धनबाद, धनबाद से लेकर रांची तक सिंडिकेट से जुड़े "धनपशु" दिल्ली में लॉबिंग कर रहे है. वह चाह रहे हैं कि सीआईएसएफ की कार्रवाई थोड़ी धीमी हो जाए. इस सिंडिकेट में कई राजनीतिक दल के बड़े-बड़े नेता शामिल हैं . वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कोयले के काले धंधे में शामिल बताए जाते है.
अवैध कोयला सिंडिकेट की एक मजबूत टीम दिल्ली में बैठी हुई है
सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि अवैध कोयला सिंडिकेट की एक मजबूत टीम दिल्ली में बैठी हुई है. हालांकि उसे इसमें कितनी सफलता मिलेगी, यह तो भविष्य के गर्भ में है. लेकिन उनकी बेचैनी दल(राजनीतिक दल ) की सीमाओं को तोड़ दिया है. हैं अलग -अलग दल में ,लेकिन इस मुद्दे पर सभी एक हैं. मामला सीधे गृह मंत्रालय से जुड़ा हुआ है ,इसलिए उन्हें इस मामले में कितनी सफलता मिलेगी,आगे बढ़ पाएंगे अथवा नहीं , यह कहना अभी मुश्किल है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पूरे मामले की निगरानी कर रहे है. कोयला मंत्रालय की भी गंभीरता दिख रही है. दरअसल, अवैध कोयला खनन और परिवहन के चलते कोयला कंपनियों की आर्थिक सेहत बिगड़ रही थी. कोयला मंत्रालय इसको लेकर लगातार चिंता व्यक्त कर रहा था. बता दें कि कोयला चोरी अब छोटे स्तर की समस्या नहीं रह गई है. यह संगठित अपराध का रूप ले चुकी है. धनबाद और आसपास के इलाकों में हर साल हजारों करोड़ों रुपए के कोयला अवैध तरीके से निकाला जाता है.
सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि एक छटाक भी चोरी नहीं हो
सरकार का लक्ष्य है कि खदान से लेकर आपूर्ति तक एक छटाक भी कोयले की चोरी ना हो, इसके लिए बड़े कदम उठाए गए है. जैसे CISF को विशेष अधिकार--खान और खनिज अधिनियम (MMDR ) के तहत सीआईएसएफ और कोल इंडिया के अधिकारियों को अवैध खनन वाले इलाकों में तलाशी लेने, अवैध कोयला और वाहन जब्त करने तथा सीधे कानूनी कार्रवाई शुरू करने का अधिकार दिया गया है.क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT)---संवेदनशील खदानों में CISF की विशेष टीमें तैनात रहेंगी, जो सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई करेंगी. 24 घंटे डिजिटल निगरानी--हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए खदानों और परिवहन मार्गों पर लगातार नजर रखी जा रही है. ई-वे बिल की सख्त जांच--GST विभाग की मदद से हर ट्रक के ई-वे बिल की जांच ,जिससे केवल वैध कोयला ही बाजार और उद्योगों तक पहुंचे.
