Jharkhand

धनबाद में कोयला चोरी : कोयला मंत्रालय क्यों हुआ गंभीर, अब क्यों शुरू होगी निर्णायक लड़ाई 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD); कोयला मंत्रालय, धनबाद कोयलांचल में कोयला चोरी पर अंकुश को लेकर गंभीर हो गया है.  लगातार नए-नए निर्देश और आदेश जारी किए जा रहे हैं.  बीसीसीएल के सीएमडी तो कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही कोयला चोरी को लेकर मुखर हैं.  धनबाद कोयलांचल में कोयला उत्पादन और डिस्पैच की हालत में सुधार नहीं हुआ और कोयला चोरी पर अंकुश नहीं लगा, तो देश का घरेलू स्टील  उद्योग भी प्रभावित हो सकता है.  जंग के बीच कोयला  ने बिजली आपूर्ति में भी अपना प्रभाव छोड़ा है.  पावर प्लांट में कोयले की डिमांड लगातार बढ़ रही है.  आपको बता दें कि देश में उत्पादित कोकिंग  कोल  में बीसीसीएल  की हिस्सेदारी लगभग आधी की है. 

कोकिंग कोल घरेलू स्टील उद्योग  के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है
 
कोकिंग कोल घरेलू स्टील उद्योग  के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है.  घरेलू कोकिंग कोल्  का उत्पादन बढ़ने से विदेश से होने वाले कोयले के आयात पर निर्भरता कम होती है.  यह  अलग बात है कि स्टील उद्योग की मांग पूरी करने के लिए बीसीसीएल काम कर  रही है.  अगर बिजली की बात की जाए, तो सिर्फ एक महीने यानी अप्रैल के मुकाबले मई  महीने में कोयला आधारित बिजली की खपत 1378 मिलियन यूनिट बढ़ी  है ,जबकि तेल और गैस आधारित बिजली में मामूली वृद्धि हुई है.  अब कोयला मंत्रालय धनबाद पर फोकस किया है. सूत्रों के अनुसार बीसीसीएल में अवैध खनन के खिलाफ कोयला मंत्रालय से अप्रूव्ड एसओपी  धनबाद पहुंच गया है.  

अप्रूव्ड एसओपी के तहत एक्शन की तैयारी 

कोयला मंत्रालय इसे बीसीसीएल को भेज दिया है.  सूत्रों के अनुसार एसओपी  में कोयला मंत्रालय ने खान और खनिज विकास और विनियमन अधिनियम के तहत अवैध खनन के खिलाफ कोयला कंपनी और सीआईएसएफ की ओर से की जाने वाली एक्शन की रूपरेखा की विस्तृत जानकारी है.  कोयला मंत्रालय ने खान और खनिज विकास और विनियमन अधिनियम में संशोधन कर एसओपी  को अवैध खनिज दस्तावेज और वाहनों की तलाशी और जब्ती  का सीधे  अधिकार दे दिया गया है.  उल्लेखनीय है कि धनबाद में कोयला चोरी और अवैध खनन केवल लोकल परेशानी नहीं है, यह मामला कोयला मंत्रालय से लेकर संसद  और राज्य की राजनीति तक पहुंच गया है.  कोयला मंत्री से लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई जन  प्रतिनिधि सार्वजनिक रूप से इस पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं.  कोयला चोरी का सबसे बड़ा असर भू-धंसान  और लोगों की सुरक्षा पर दिखने लगा है.