Jharkhand

Coal India में जेबीसीसीआई-12 को लेकर घमासान, आर-पार की लड़ाई के मूड में यूनियनें

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
Coal India में जेबीसीसीआई-12 को लेकर घमासान, आर-पार की लड़ाई के मूड में यूनियनें

धनबाद (DHANBAD): जेबीसीसीआई-12 को लेकर कोयला उद्योग का माहौल गरमाने लगा है. आपसी विवाद के बावजूद मजदूर संगठन जेबीसीसीआई-12 के गठन को लेकर एकमत हैं. पहली जुलाई को मांग  दिवस को लेकर चार ट्रेड यूनियन एक साथ हैं. वही बीएमएस भी अपने स्तर से जेबीसीसीआई-12 की मांग को लेकर सक्रिय है. मतलब सभी यूनियन जेबीसीसीआई-12 के गठन को लेकर एकमत हैं. वैसे बीएमएस और गैर बीएमएस यूनियनों की राह अलग है. दरअसल, चार लेबर कोड को लेकर कोल इंडिया मैनेजमेंट अभी तक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं किया है कि जेबीसीसीआई-12 का गठन होगा अथवा नहीं होगा और होगा तो कब तक होगा? इसको लेकर कोयला उद्योग में संशय बना हुआ है.  

चार मान्यता प्राप्त यूनियन ने सौपा है पत्र 

जानकारी के अनुसार हिन्द खदान मजदूर फेडरेशन, इंडियन नेशनल माइन वर्कर्स फेडरेशन, इंडियन माइन वर्कर्स फेडरेशन और ऑल इंडिया कोल् वर्कर्स फेडरेशन ने कोल इंडिया प्रबंधन और सिंगरौली कोल कंपनी लिमिटेड को संयुक्त रूप से ज्ञापन देकर वेतन समझौते के लिए जेबीसीसीआई-12 गठन की मांग की है. चारों महासंघ कोयला प्रबंधन के रवैये को लेकर चिंतित हैं. दरअसल, जेबी सीसीआई-12 का गठन कोयला उद्योग में एक बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है. वैसे चार लेबर कोड को लेकर यूनियनों पर भी संकट है. कुल मिलाकर देखा जाए तो कोयला उद्योग में आने वाले दिनों में औद्योगिक अशांति हो सकती है. 

जेबीसीसीआई-11 का कार्यकाल 30 जून 2026 को खत्म हो रहा

दरअसल, जेबीसीसीआई-11 का कार्यकाल 30 जून 2026 को खत्म हो रहा है. सूत्रों के अनुसार11वीं जेबीसीसीआई के गठन के लिए कोल इंडिया ने अप्रैल 2021 में मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था. जिसके बाद 6 मई 2021 को मंजूरी दी गई थी. लेकिन 12वीं जेबीसीसीआई के लिए अभी तक मंत्रालय को कोई औपचारिक पत्र नहीं भेजा गया है. यहां यह बताना भी जरूरी है कि कोयला उद्योग में वेतन समझौते और श्रमिक हितों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मंच जेबीसीसीआई होता है और इस पर सब की निगाहें टिकी होती है. बता दें कि कोल इंडिया लिमिटेड में प्रस्तावित लेबर कोड के क्रियान्वयन को लेकर ट्रेड यूनियन भी सक्रियता बढ़ा दी है. सूत्रों पर भरोसा करें तो विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियन के नेताओं ने अभी हाल ही में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से बातचीत कर कोल इंडिया की यूनियनों को लेबर कोड के कुछ प्रावधानों में राहत देने की मांग की है. अब पहली जुलाई को क्या होता है, इसपर सबकी निगाह है.