Jharkhand

Coal India: वेतन समझौते पर बढ़ी बेचैनी, बैठक में भी नहीं बनी बात, यूनियनों ने प्रबंधन को दी खुली चेतावनी

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
Coal India: वेतन समझौते पर बढ़ी बेचैनी, बैठक में भी नहीं बनी बात, यूनियनों ने प्रबंधन को दी खुली चेतावनी

धनबाद (DHANBAD): कोयला उद्योग में अजब सी हलचल है. कोयला मजदूरों का वेतन समझौता होगा या नहीं, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है. जून का महीना चल रहा है और पहली जुलाई से कोयला वेतन समझौता 12 की अवधि शुरू हो जाएगी. एपेक्स जेसीसी की बैठक में उम्मीद की जा रही थी कि इसका कोई हल निकल कर सामने आएगा, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. प्रबंधन अपनी राग अलापता रहा तो यूनियन अपनी बातें कहती रहीं. सूत्रों के अनुसार एपेक्स जेसीसी की बैठक में यूनियनों ने प्रबंधन को साफ कह दिया है कि लेबर कोड पर चर्चा होती रहेगी. आगे कहा गया कि पहले कोयला वेतन समझौता के लिए जेबीसीसीआई 12 का गठन हो और वेतन समझौता के लिए बातचीत शुरू की जाए.  

आखिर दूसरी पीएसयू में चर्चा क्यों नहीं 

यूनियन नेताओं ने सवाल दागा कि किसी दूसरी पीयूसी  में लेबर कोड  को लेकर इतनी हड़बड़ी नहीं है, तो कोल इंडिया मैनेजमेंट आखिर क्यों इतना परेशान है? यूनियनों ने कहा कि पहले मजदूरों के वेतन समझौता की बात हो, चार लेबर कोड के क्रियान्वयन की बात आगे चलती रहेगी. इस बीच यह भी  पता चला है कि कोल इंडिया मैनेजमेंट ने कोई ठोस भरोसा यूनियन के नेताओं को नहीं दिया है. सिर्फ इतना कहा है कि कोयला मंत्रालय से बात की जाएगी. यूनियन नेताओं ने अपना पक्ष रखा कि अगर मैनेजमेंट जेबीसीसीआई-12 गठन की इच्छा रखता है तो लेबर कोड  इसमें बाधक नहीं होगा. कई तकनीकी मामले हैं, जिसके आधार पर जेबीसीसीआई का गठन हो सकता है. उल्लेखनीय है कि कोयला वेतन समझौता-11 की अवधि समाप्त हो रही है. पहली जुलाई से कोयला वेतन समझौता-12 का समय शुरू हो जाएगा.

यूनियनों ने भी साफ़ कर दिया है कि वह चुप नहीं रहेंगीं

यूनियनों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर बेहतर औद्योगिक संबंध रखना चाहते हैं तो तुरंत जेबीसीसीआई -12 का गठन किया जाए. बैठक में चारों सेंट्रल ट्रेड यूनियन के नेता मौजूद थे. कोल इंडिया के भी बड़े अधिकारी उपस्थित थे. इधर, सूत्र बता रहे हैं कि कोल इंडिया मैनेजमेंट ने यूनियन के समक्ष कोयला उद्योग की परेशानियों का जिक्र भी किया. कहा कि प्राइवेट प्लेयर्स से प्रतियोगिता बढ़ रही है. कोल इंडिया के कोयले की डिमांड घट रही है. ऐसे में यूनियन सहयोग करें, जिससे कोल इंडिया को सही राह पर ले जाया जा सके. यह बैठक शुक्रवार को कोलकाता में हुई थी. दरअसल, जेबीसीसीआई -12 का गठन नहीं हुआ तो यूनियन नेताओं के लिए परेशानी होगी. कोयला कर्मियों को यह कैसे बताएंगे कि उनके लिए यूनियन काम कर रही हैं. वैसे भी चार लेबर कोड को लेकर कोयला उद्योग में संचालित यूनियन उलझन में हैं.