धनबाद: देश ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया 50 साल पूरे कर आगे बढ़ निकली है. 1 नवंबर 1975 को कोल इंडिया का गठन हुआ था. इसके पहले 1971 में कोकिंग कोल कोलियारियो का राष्ट्रीयकरण हुआ था. फिर 1973 में गैर कोकिंग कोल कोलियारियों का राष्ट्रीयकरण हुआ था. फिर आगे चलकर 1975 में कोल इंडिया का गठन हुआ .
50 साल में कोल इंडिया कई उतार-चढ़ाव भी देखे हैं. जिस समय कोल इंडिया बनी थी, उस समय लगभग 8 लाख कर्मचारी कार्यरत थे. उत्पादन का लक्ष्य 79 मिलियन टन था. फिलहाल उत्पादन लक्ष्य 814 मिलियन टन है और कर्मचारियों की संख्या दो लाख आठ हजार से कुछ अधिक है. कोल इंडिया के खाते में एक और आंकड़ा जुड़ता है. 2008 में इसे नवरत्न कंपनी का दर्जा मिला था. फिर 2011 में महारत्न कंपनी का दर्जा मिला.
कोल इंडिया की सहायक कंपनियां देश भर में फैली हुई हैं. झारखंड में कोयले का उत्पादन अधिक होता है. झारखंड से सटे बंगाल और संथाल परगना में भी कोल इंडिया की खदानें हैं. अब आपको ले चलते हैं 1971 के दौर में ,उस समय निजी खान मलिक हुआ करते थे. कोयले का उत्पादन उनके अनुसार होता था. खदान के भीतर से कोयला काटने के लिए बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के मजदूरों को बुलाया जाता था. और यहां कोयले का उत्पादन होता था.
लेकिन 1971 में एक ऐसा दौर आया, जब रातों-रात मालिकों के हाथ से कोलियारियां निकल गई. उनके निजी नाम पर जो प्रॉपर्टी थी, वह तो बच गई लेकिन कोलियरी के नाम पर जो भी संपत्ति थी, वह सरकारके अधीन हो गई. कोलियरी मालिकों की दशा एकाएक खराब हो गई. फिर कोलियरी मालिक रोजगार के कोई ना कोई रास्ता देखने लगे. उसके बाद हार्ड कोक फैक्ट्रियां लगनी शुरू हो गईं .कोलियरी मलिक रहे लोगों और उनके परिवार को रोजगार का एक साधन मिल गया था. यह अलग बात है कि कोल इंडिया का आज उत्पादन निश्चित रूप से बढ़ा है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है.
आउटसोर्स कंपनियों का प्रवेश हो रहा है. मतलब ठेकेदारी प्रथा बढ़ती जा रही है. 1971 और उसके बाद कोयले के उत्पादन में इलाके के सुरक्षा का भी ख्याल रखा जाता था. लेकिन प्राइवेट कंपनियों के प्रवेश से इलाके की सुरक्षा पर खतरा भी बनता जा रहा है. कंपनियों को सिर्फ कोयले के उत्पादन से मतलब होता है. कहा जा सकता है कि 1975 की कोल इंडिया और 2026 की कोल इंडिया में बहुत अंतर दिख रहा है .कोल इंडिया को अब कोयले के अलावा दूसरी मिनरल की ओर भी कदम बढ़ाना पड़ रहा है.
1975 और उसके बाद माफिया गिरी से कोयला कंपनियों को परेशान थी. लेकिन आज कोयला चोरी से तबाह हैं. इधर, बीसीसीएल में कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह खुशी है कि कोल इंडिया की स्थापना दिवस पर एक नवंबर को बीसीसीएल के लगभग 1000 कर्मियों को प्रमोशन मिल सकता है. प्रमोशन की सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है. दरअसल हर एक साल कोल इंडिया स्थापना दिवस पर मैनपॉवर बजट के अनुसार कोयला कर्मियों को प्रमोशन दिया जाता है. प्रमोशन पाने वाले कर्मियों को तीन प्रतिशत वेतन वृद्धि का लाभ मिलता है. मुख्यालय कोयला भवन में पद स्थापित कर्मियों के साथ-साथ एरिया में भी पदस्थापित कोयला कर्मियों को प्रोन्नति का लाभ मिल सकता है.
