Jharkhand

Coal India : जेबीसीआई -12 के लिए कंपनी का पत्र नहीं पंहुचा है मंत्रालय के पास ,क्यों है हलचल 

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
Coal India : जेबीसीआई -12 के लिए कंपनी का पत्र नहीं पंहुचा है मंत्रालय के पास ,क्यों है हलचल 

धनबाद(DHANBAD) | देश ही नहीं, पूरी दुनिया की  सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया में हलचल मची हुई है.  कोयला मजदूर जानना चाह रहे हैं कि उनके लिए जेबीसीसीआई -12 का गठन कब होगा, होगा भी अथवा नहीं।  मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियन भी इसको लेकर चिंतित हैं.  दरअसल,  जेबीसीसीआई-11  का कार्यकाल 30 जून 2026 को खत्म हो रहा है.  सूत्रों के अनुसार 11वीं जेबीसीसीआई के गठन के लिए कोल इंडिया ने अप्रैल 2021 में मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था.  जिसके बाद 6 मई  2021 को मंजूरी दी गई थी. लेकिन 12वीं जेबीसीसीआई के लिए अभी तक मंत्रालय को कोई औपचारिक पत्र नहीं भेजा गया है. 

वेतन समझौते का सबसे मजबूत मंच होता है जेबीसीसीआई
 
यहां यह बताना भी जरूरी है कि कोयला उद्योग में वेतन समझौते और श्रमिक हितों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मंच जेबीसीसीआई होता है और इस पर सब की निगाहें टिकी होती है.  बता दें कि कोल इंडिया लिमिटेड में प्रस्तावित लेबर कोड  के क्रियान्वयन को लेकर ट्रेड यूनियन भी सक्रियता बढ़ा दी है.  सूत्रों पर भरोसा करें तो विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियन के नेताओं ने अभी हाल ही में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से बातचीत कर कोल इंडिया की यूनियनों को लेबर कोड  के कुछ प्रावधानों में राहत देने की मांग की है. 

 यूनियनों ने मंत्रालय के समक्ष क्या रखीं हैं डिमांड 

 सूत्र बताते हैं कि  यूनियनों ने मंत्रालय के समक्ष मांग रखी है कि  यूनियनों की मान्यता एवं वार्ताकारी परिषद में प्रतिनिधित्व के लिए निर्धारित 20% मतों की अनिवार्यता को कम किया जाए.  केंद्रीय एवं श्रम मंत्रालय ने इस पर कुछ सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया है.  उल्लेखनीय है कि लेबर कोड  के प्रावधानों के अनुसार किसी यूनियन को वार्ताकार परिषद में प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए कुल  कार्यरत कर्मचारियों  का कम से कम 20% मत हासिल करना जरूरी होगा।  जानकार बताते हैं कि कोल्  इंडिया स्तर पर किसी एक यूनियन के लिए इतनी बड़ी संख्या में मत हासिल करना आसान नहीं होगा और यही वजह है कि अधिकांश यूनियन  इस प्रावधान का विरोध कर रही हैं.  5 जून को आयोजित कोल इंडिया की एपेक्स जेसीसी बैठक में भी मजदूर संगठनों ने आपत्ति जताई थी.