धनबाद(DHANBAD): कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ ) तो एक बार फिर चर्चा में है. इस बार चर्चा प्रभारी आयुक्त के सेवा विस्तार को लेकर है. वैसे सीएमपीएफओ की चर्चा इसी साल मार्च महीने में तेज हुई थी ,जब 75 रिटायर्ड बड़े कोयला अधिकारियों ने सीधे प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पेंशन में सुधार की मांग की थी. इस पत्र पर अब तक क्या एक्शन हुआ है, यह तो सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन सेवा विस्तार के बाद कोयला मजदूरों में चर्चाओं का बाजार गर्म है. जानकारी के अनुसार कोयला खान भविष्य निधि संगठन के प्रभारी आयुक्त को सेवा विस्तार मिल गया है. मतलब कोयला क्षेत्र के लाखों लाख कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के पीएफ और पेंशन की देखरेख करने वाली संस्था आगे भी प्रभाव में चलेगा।
केंद्रीय कमेटी की नियुक्ति समिति ने क्या कहा है ---
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय कमेटी की नियुक्ति समिति ने 9 जून को जारी आदेश में उन्हें आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार 31 अक्टूबर 2026 तक या अगले आदेश तक जारी रखने की मंजूरी दी है. उल्लेखनीय है कि सीएमपीएफओ देश के कोयला उद्योग से जुड़े लाखों कार्यरत एवं सेवानिवृत कर्मचारी कि भविष्य निधि, पेंशन तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा की देखरेख करता है. सीएमपीएफओ के प्रशासनिक अथवा वित्तीय निर्णय का सीधा असर कर्मचारी एवं पेंशन भोगियों पर पड़ता है. मजदूर संगठन सवाल कर रहे हैं कि आखिर सीएमपीएफओ को नियमित आयुक्त कब मिलेगा। उल्लेखनीय है कि कोल इंडिया के पूर्व चेयरमैन,निदेशक, सहायक कंपनियों के पूर्व सीएमडी,निदेशक एवं सिंगरेनी के पूर्व समेत 75 अधिकारियों ने पीएम से कोल पेंशन में सुधार का आग्रह किया था.
पत्र में क्या कहा था रिटायर्ड कोयला अधिकारियो ने ----
पत्र में कोल अधिकारियों ने पीएम से यह आग्रह किया था कि कोयला पेंशन में संशोधन किया जाए,महंगाई से जुड़े समय समय पर समायोजन किया जाए,CMPS 98 के अंतर्गत किए अंशदान पर उचित रिटर्न सुनिश्चित किया जाए, सेवानिवृत कोयला कर्मचारियों की गरिमा एवं वित्तीय सुरक्षा को बहाल किया जाये। पत्र में कहा गया था कि लगभग 5 लाख सेवानिवृत्त कोयला कर्मियों की ओर से, गंभीर अपील प्रस्तुत करते हैं कि सेवानिवृत्त कोयला कर्मचारियों की पेंशन संशोधन की लंबे समय से लंबित मांग पर आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। समस्या की जड़ यह है कि सेवानिवृत्ति की तिथि पर निर्धारित पेंशन, मूल्य वृद्धि के अनुसार किसी भी प्रकार के समायोजन के बिना, स्थिर बनी रहती है। “ यही सेवानिवृत्त कर्मी, जिन्होंने राष्ट्र की उन्नति में अपना जीवन समर्पित किया, बढ़ती महंगाई, दवाइयों और मूलभूत आवश्यकताओं के कारण असंगत हो चुकी पेंशन पर जीवन यापन करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।“
