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Jharkhand

Breaking: धनबाद से रांची को बड़ा सन्देश, सत्ताधारी दल के विधायक अरूप चटर्जी बैठे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर, क्या  है डिमांड? 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद(DHANBAD):  विपक्ष के विधायकों का तो अपनी मांगों को लेकर धरना पर बैठने की बात सामने आती रही है.  लेकिन धनबाद में  सत्ताधारी दल के विधायक अरूप चटर्जी मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय परिसर में  अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं.  अरूप  चटर्जी निरसा से माले  के विधायक हैं और माले  झारखंड सरकार को बाहर से समर्थन कर रही है.  अरूप  चटर्जी शिक्षा विभाग में स्वेच्छाचारिता , भ्रष्टाचार के आरोप लगा  रहे है.  उनके समर्थन में उनके समर्थक भी मौजूद हैं, तो पूर्व विधायक आनंद महतो भी धरने पर है.  

विधायक का दावा : उनका आंदोलन जनहित में है 

इस धरने का राजनीतिक मतलब भी निकाला जा सकता है.  हालांकि अरूप  चटर्जी ने पूछे जाने पर कहा कि सत्ताधारी दल के विधायक होने का यह मतलब नहीं है कि अपनी मांगों या गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन नहीं किया जाए.  उनका आंदोलन जनहित के लिए है, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए है. विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि उनकी लड़ाई सरकार से नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था से है. सरकार ने शिक्षकों की नियुक्ति की है, लेकिन उन्हें जरूरत के मुताबिक स्कूलों में पदस्थापित नहीं किया जा रहा है. गांवों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है,  बावजूद छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार शिक्षकों की उपलब्धता नहीं है. इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में पैसे के खेल का आरोप लगाया 

उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को दरकिनार कर शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की जा रही है. इसके पीछे पैसे के लेन-देन की आशंका भी जताई. विधायक के मुताबिक, पिछले एक साल में करीब 1,500 शिक्षकों का तबादला किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में शिक्षकों को शहरी क्षेत्रों में पदस्थापित किया गया.अरूप चटर्जी ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि जिन सुविधाओं पर गरीब बच्चों का अधिकार है, उनका लाभ जरूरतमंद बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है. उन्होंने जिला प्रशासन पर शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया.विधायक ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा विभाग की अनियमितताओं पर रोक लगाने और व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.