Jharkhand

बड़ी खबर: झारखंड-बंगाल सीमा के मैथन डैम में पानी में तैरते दिखेंगें सौर ऊर्जा पैनल,क्या होंगे फायदे

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

Tnp desk: झारखंड -बंगाल सीमा पर स्थित मैथन डैम की खूबसूरती और उपयोगिता अब एक साथ बढ़ेगी  फ्लोटिंग सौर ऊर्जा परियोजना निर्माण की राह अब साफ होती दिख रही है.  ग्रामीणों के साथ मैनेजमेंट की सहमति बन गई है.  इसके साथ ही प्रोजेक्ट को लेकर चल रहा विरोध भी खत्म हो गया है.  अब जल्द निर्माण कार्य शुरू हो सकता है.  फ्लोटिंग सौर ऊर्जा के लिए पैनल  को जमीन पर लगाने के बजाय किसी झील, बांध, जलाशय, खदान के जल भराव या बड़े तालाब की सतह पर विशेष  तैरने वाले प्लेटफार्म के ऊपर स्थापित किया जाता है.  

पैनल लगाने में जमीन की नहीं होती जरुरत 

इसे लगाने में जमीन की जरूरत नहीं पड़ती है.  पानी के कारण पैनल ठंडे रहते हैं, जिससे उसकी क्षमता बढ़ जाती है.  जलाशय से पानी का वाष्पीकरण  कम होता है.  बड़े बांधों और खदानों के पानी का बेहतर उपयोग हो जाता है.  कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है.  जानकारी के अनुसार अभी तक तेलंगाना, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल में यह प्रोजेक्ट काम  कर रहे हैं.  जानकारी के अनुसार करीब 1200 करोड रुपए की लागत से बनने वाली इस परियोजना की क्षमता 234 मेगावाट की होगी.

काम पूरा होने में लग सकता है दो साल का समय 
 
कार्य पूरा करने में 2 साल लग सकते हैं.  प्रतिवर्ष लगभग 500 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हो सकता है.  सूत्रों के अनुसार फ्लोटिंग सोलर पैनल जलाशय के किनारे से कम से कम 3 किलोमीटर दूर मध्य भाग में स्थापित किए जाएंगे।  जिससे स्थानीय गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा , डीवीसी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि परियोजना में अकुशल  श्रमिकों के सभी कार्यों में स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाएगा. वहीं स्थानीय युवको  को योग्यता के अनुसार विभिन्न कार्यों के अवसर भी मिल सकते है.