Jharkhand

अंग्रेजों के ज़माने के करकेंद के थोक कपड़ा कारोबार पर "भष्मासुर" का हाथ, क्या जागेगी झारखंड सरकार 

Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist
अंग्रेजों के ज़माने के करकेंद के थोक कपड़ा कारोबार पर "भष्मासुर" का हाथ, क्या जागेगी झारखंड सरकार 

धनबाद (DHANBAD): कोयलांचल के कतरास, झरिया और करकेंद अपनी आंचल में इतिहास को अभी भी समेट रखा है. झरिया की विधायक रागिनी सिंह हैं, तो कतरास यानी बाघमारा विधानसभा के विधायक शत्रुघ्न महतो हैं, तो करकेंद  यानी धनबाद विधानसभा के विधायक राज सिन्हा हैं. झरिया और कतरास की बदहाली की बात कभी और होगी लेकिन फिलहाल हम बात करेंगे करकेंद के थोक कपड़ा व्यवसाय का. यह आज का नहीं है, यह कारोबार अंग्रेजों के जमाने का है. उसे समय बाजार बसाए जाते थे, लोगों को बुला-बुलाकर जगह दी जाती थी और कारोबार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था. लेकिन आज जमे-जमाए कारोबार उजड़ रहे हैं.

जिन जगहों को हेरिटेज का दर्जा मिलना चाहिए, वह अब वीरानी

जिन जगहों को हेरिटेज का दर्जा मिलना चाहिए, वहां अब वीरानी छाने लगी हैं. करकेंद्र के थोक कपड़ा व्यापार की बात की जाए, तो यह बाजार 100 साल पुराना बाजार है. कपड़ा बाजार के लिए करकेंद्र की दुकान विख्यात थी. होलसेल का कारोबार चरम पर था. बाजार के भवन चमकते थे लेकिन आज उन भवनों पर धूल का कब्ज़ा है. कई भवन तो ढहने की स्थिति में हैं. अलबत्ता कारोबारियों ने सरकार से गुहार लगाई कि उन्हें कोई निश्चित स्थान दे दिया जाए. लेकिन आज तक ऐसा हुआ नहीं. झारखंड बने भी 25 साल हो गए. झारखंड अब युवा हो गया है. ऐसे में व्यापारियों का दर्द कोई सुनने वाला नहीं है. 

कभी कई ज़िलों के कारोबारी पहुंचते थे करकेंद बाजार
 
लोग बताते हैं कि यह बाजार कपड़ा के थोक व्यापार का केंद्र था. सिर्फ धनबाद ही नहीं, बल्कि अगल-बगल के जिलों से लोग यहां खरीदारी करने आते थे. व्यापारी तो अब धीरे-धीरे अपना कारोबार समेट रहे हैं, वह कहीं और जाकर कारोबार कर लेंगे, लेकिन इस कपड़े के थोक व्यवसाय पर निर्भर लोगों के रोजगार का क्या होगा? बात इतनी ही नहीं है, जिनके परिवार के लोगों ने पाई-पाई जोड़कर कारोबार शुरू किया था, भवन का निर्माण कराया था, आज वह भवन भी छोड़ने की स्थिति हैं. भू-धंसान की वजह से धनबाद-बोकारो की सड़क को फिलहाल बंद कर दिया गया है. इस वजह से अब तो व्यवसाय पूरी तरह से खत्म होता जा रहा है. हाल के दिनों में धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क पर पड़ी दरार के बाद सड़क को बंद कर दिया गया और पिछले एक महीने से सड़क अवरुद्ध है.  

क्या कभी लौट पाएगी करकेंद थोक कपड़ा कारोबार की रौनक

सड़क बंद होने से व्यापारियों की हालत और भी खराब हो गई है. ग्राहक अब तो केंदुआ थोक बाजार नहीं पहुंच पा रहे हैं. कोयला खनन के विस्तार के साथ ही करकेंद की समस्याएं बढ़ती चली गई. भूमिगत आग और भू-धंसान ने  पूरे इलाके को असुरक्षित बना दिया है. कारोबारी खुद के कारोबार और परिवार को लेकर चिंतित हैं. बहुत लोग तो अपना कारोबार धनबाद शिफ्ट कर लिए हैं. बहुत लोग करने की राह पकड़ चुके हैं, लेकिन 100 साल पुराने इस बाजार की रौनक क्या अब कभी लौट पाएगी? यह एक बड़ा सवाल है. सवाल यह भी है कि करकेंद्र के थोक व्यवसाय को एक जगह बसाने के लिए क्या कभी जनप्रतिनिधियों ने मजबूत आवाज उठाई है? करकेंद्र के थोक व्यवसाय का फायदा धनबाद के सभी  विधानसभा क्षेत्र के अलावे अगल-बगल के विधानसभा क्षेत्र के लोग भी उठाते रहे हैं. क्या अगर सभी विधायक एक साथ मिलकर सरकार से जगह दिलाने की कोशिश करें, तो क्या यह असंभव है? लेकिन फिर सवाल वही है कि बिल्ली की गले में घंटी बांधेगा कौन?