Jharkhand

धनबाद की सियासत में ‘मजदूर मसीहा’ को लेकर छिड़ी जंग, सिंह मेंशन बनाम ढुल्लू महतो की जुबानी जंग हुई तेज

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
धनबाद की सियासत में ‘मजदूर मसीहा’ को लेकर छिड़ी जंग, सिंह मेंशन बनाम ढुल्लू महतो की जुबानी जंग हुई तेज

धनबाद (DHANBAD): बात कोयलांचल की राजनीति की हो और वहाँ सिंह मेंशन का नाम ना आए, ऐसा शायद ही काभी हुआ हो. ऐसे में इन दिनों इलाके में ‘मजदूर मसीहा’ की उपाधि को लेकर नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है, जो दिन-ब-दिन तूल पकड़ता नजर आ रहा है और अब धनबाद नगर निगम चुनाव के दौरान शुरू हुई सिंह मेंशन और धनबाद सांसद ढुल्लू महतो के बीच की राजनीतिक खींचतान अब खुली बयानबाजी में बदल गई है. ऐसे में जहां एक ओर मजदूर हित, अपराध, जनसेवा और नेतृत्व को लेकर दोनों खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक सरगर्मी भी देखने को मिल रही है. 

धनबाद के मेयर संजीव सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या बयान देता है. उनके अनुसार जनता ही तय करेगी कि मजदूरों और आम लोगों के हित में किसने काम किया है. उन्होंने कहा कि निगम चुनाव के दौरान उन्होंने आउटसोर्सिंग कंपनियों में काम कर रहे मजदूरों के शोषण का मुद्दा उठाया था और आज भी मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध हैं. संजीव सिंह ने दावा किया कि बाघमारा से लेकर झरिया तक मजदूरों के हक की आवाज बुलंद की जाएगी.

वहीं सांसद ढुल्लू महतो ने ‘मजदूर मसीहा’ की बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धनबाद के असली मजदूर नेता और मसीहा दिवंगत बी.पी. सिन्हा, दिवंगत ए.के. राय और दिवंगत समरेश सिंह थे. उन्होंने कहा कि जनता अच्छी तरह जानती है कि मजदूरों के अधिकारों के लिए किसने संघर्ष किया. सांसद ने धनबाद में गुंडागर्दी और माफियागिरी के खिलाफ भी मोर्चा खोलते हुए कहा कि वह शहर में अमन-चैन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में बनने वाले कई बड़े प्रोजेक्ट्स में माफिया तत्वों की भूमिका रही है, जिसे खत्म करना जरूरी है.

सांसद के बयानों पर पलटवार करते हुए झरिया विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि खुद को मजदूरों का हितैषी बताने वालों को यह बताना चाहिए कि उन्होंने मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए अब तक क्या किया है. उन्होंने कहा कि मजदूरों की समस्याओं को उन्होंने लगातार विधानसभा में उठाया है. रागिनी सिंह ने कहा कि सिर्फ मंचों और मीडिया में बयान देने से मजदूरों का भला नहीं होगा, बल्कि उनके मुद्दों को संसद और विधानसभा तक पहुंचाना जरूरी है.

उन्होंने अपने पति और धनबाद मेयर संजीव सिंह का बचाव करते हुए कहा कि वे हर परिस्थिति में लोगों के साथ खड़े रहते हैं. रागिनी सिंह ने दावा किया कि जिस तरह स्वर्गीय सूर्यदेव सिंह जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करते थे, उसी परंपरा को संजीव सिंह आगे बढ़ा रहे हैं. फिलहाल ‘मजदूर मसीहा’ को लेकर छिड़ी यह सियासी बहस धनबाद की राजनीति में नई गर्मी ले आई है. आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत मिल रहे हैं. अब देखना होगा कि जनता किसके दावों पर भरोसा जताती है और किसे मजदूरों का वास्तविक हितैषी मानती है.

रिपोर्ट: नीरज कुमार