Jharkhand

बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में माफिया गठजोड़ पर बोला बड़ा हमला,सीएमडी पर एफआईआर को "खेल" का हिस्सा बताया,पुलिस भी निशाने पर

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

धनबाद: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने धनबाद में माफिया गठजोड़ पर तेज हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि अब तो बीसीसीएल के सीएमडी को भी थ्रेट मिल रहा है. कतरास के छाता बाद धंसान मामले में सीएमडी के खिलाफ एफआईआर को भी उन्होंने किसी बड़े साजिश का हिस्सा बताया है.

 बता दें कि आज मीडिया में बीसीसीएल के सीएमडी को जान मारने की कथित साजिश की बात सामने आने के बाद बाबूलाल मरांडी ने एक लंबा चौड़ा ट्वीट किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की गहन जांच करने की मांग की है. अपने ट्वीट में कहा है कि धनबाद में अब सवाल सिर्फ कोयला चोरी का नहीं, बल्कि कथित पुलिस–कोयला माफिया गठजोड़ का भी है.

केंद्र सरकार के अधीन एजेंसियों और CISF द्वारा अवैध कोयला कारोबार पर शिकंजा कसते ही आखिर किसके इशारे पर @BCCL official और उसके अधिकारियों पर दबाव बढ़ने के आरोप लग रहे हैं? वैध कोयला ढोने वाले वाहनों को रोकना, मुकदमों में उलझाना और अब छाता बाद भू-धंसान मामले में BCCL के CMD मनोज अग्रवाल तक को आरोपी बनाना, ये महज़ संयोग हैं या किसी बड़े खेल की कड़ियां?

सबसे गंभीर बात यह कि BCCL के CMD को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियों और कोयला माफिया से खतरे को लेकर हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ रही है. अगर यह स्थिति है, तो सवाल सीधे धनबाद पुलिस से है कि पुलिस कानून की रखवाली कर रही है या कोयला माफिया के हितों की?

आरोप बेहद गंभीर हैं कि अवैध खनन पर केंद्रीय एजेंसियों की सख्ती के बाद BCCL के वैध खनन और परिवहन को ही परेशान करने की रणनीति अपनाई जा रही है, ताकि अधिकारियों पर दबाव बने और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई कमजोर पड़े. यदि ऐसा है तो यह प्रशासन नहीं, माफिया तंत्र को सरकारी संरक्षण देने का मामला है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.आरोप बेहद गंभीर हैं कि अवैध खनन पर केंद्रीय एजेंसियों की सख्ती के बाद BCCL के वैध खनन और परिवहन को ही परेशान करने की रणनीति अपनाई जा रही है, ताकि अधिकारियों पर दबाव बने और अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई कमजोर पड़े। 

यदि ऐसा है तो यह प्रशासन नहीं, माफिया तंत्र को सरकारी संरक्षण देने का मामला है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।उन्होंने आगे कहा है कि 
@HemantSorenJMM जी, सत्ता की ताकत से सवाल दब सकते हैं, लेकिन सच नहीं. कोयला, बालू और पत्थर के काले कारोबार पर कार्रवाई से इतनी बेचैनी क्यों? 

धनबाद पुलिस पर लगे माफिया गठजोड़ के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराइए और बताइए कि पुलिस की वर्दी कानून के साथ खड़ी है या कोयले के काले कारोबार के साथ?धनबाद को पुलिस चाहिए, कोयला माफिया की सुरक्षा एजेंसी नहीं।