Jharkhand

देवघर में रोपवे बंद तो हेलीकॉप्टर बना आकर्षण, आसमान से बाबा मंदिर का दर्शन कर रहे श्रद्धालु

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

देवघर (DEOGHAR) : झारखंड के देवघर में श्रावणी मेले के दौरान इस बार हेलीकॉप्टर से हवाई दर्शन श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. त्रिकुट पर्वत का रोपवे बंद होने के कारण मायूस होने वाले श्रद्धालु अब हेलीकॉप्टर में बैठकर बाबा बैद्यनाथ मंदिर, देवघर शहर और आसपास के खूबसूरत इलाकों का आसमान से दीदार कर रहे हैं.

रोपवे श्रद्धालुओं की पहली पसंद हुआ करता था

त्रिकुट पर्वत पर संचालित रोपवे कभी देवघर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद हुआ करता था. जमीन से करीब 800 मीटर की सीधी चढ़ाई के दौरान प्राकृतिक सुंदरता का नजारा लोगों को रोमांचित करता था. लेकिन 10 अप्रैल 2022 को हुए रोपवे हादसे के बाद इसका संचालन बंद है. हादसे में 49 यात्री हवा में फंस गए थे. करीब 42 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में 46 लोगों को सुरक्षित बचाया गया था जबकि तीन यात्रियों की जान चली गई थी.

हेलीकॉप्टर से हवाई दर्शन की सुविधा शुरू की गई है

रोपवे बंद होने के बीच अब झारखंड सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर से हवाई दर्शन की सुविधा शुरू की है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर शुरू हुई इस सेवा के जरिए श्रद्धालु बाबा मंदिर, शिवगंगा और देवघर शहर के साथ त्रिकुट पहाड़ तथा आसपास के जंगलों की खूबसूरती देख सकते हैं. बाबा बासुकीनाथ धाम के हवाई दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है.

हेलीकॉप्टर सेवा 4 अगस्त से आरंभ की गई है 

नागर विमानन विभाग के अनुसार बाबा मंदिर और देवघर शहर के हवाई दर्शन के लिए प्रति यात्री 2,850 रुपये, त्रिकुट के लिए 3,850 रुपये और बासुकीनाथ के हवाई दर्शन के लिए 4,550 रुपये शुल्क निर्धारित है. श्रावणी मेला 30 जुलाई से शुरू हुआ, जबकि हेलीकॉप्टर सेवा 4 अगस्त से आरंभ की गई। 10 अगस्त तक सात दिनों में 436 यात्रियों ने हवाई दर्शन का आनंद उठाया. इनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं की संख्या अधिक है.

यात्रियों ने सरकार की इस पहल की सराहना की

कई श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर की यह पहली यात्रा भी है. यात्रियों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है. नागर विमानन विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हवाई दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी.