देवघर(DEOGHAR): बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने वाले कांवरियों के लिए जलाभिषेक केवल गंगाजल अर्पित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आस्था और धार्मिक विधि से जुड़ी पूरी साधना है. इस साधना में ‘संकल्प’ को विशेष स्थान दिया गया है. मान्यता है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को शुरू करने से पहले संकल्प लेने से श्रद्धालु अपने उद्देश्य और मनोकामना को विधिवत भगवान के समक्ष प्रस्तुत करता है. यही वजह है कि कांवर यात्रा और बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक में संकल्प की परंपरा प्रमुख रूप से निभाई जाती है.
सुलतानगंज से देवघर तक संकल्प का महत्व
कांवर यात्रा की शुरुआत सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर होती है. श्रद्धालु लंबी दूरी तय करते हुए देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ पर जल अर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस यात्रा में संकल्प कांवरियों की आस्था और उनकी कामना को धार्मिक अनुष्ठान से जोड़ता है. पुरोहित बताते हैं कि शास्त्रीय परंपरा में किसी कर्म को निश्चित उद्देश्य के साथ करने के लिए संकल्प का विधान है. इसी कारण कांवरिए यात्रा के विभिन्न चरणों में पुरोहितों से विधिपूर्वक संकल्प कराते हैं.
शिवगंगा में स्नान के बाद कराया जाता है संकलप
बाबाधाम पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु सबसे पहले शिवगंगा में स्नान करते हैं. इसके बाद कांवर में लाए गए गंगाजल के पात्र को निकालकर उसकी पूजा की जाती है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुरोहित श्रद्धालु का नाम और गोत्र पूछकर संकल्प की प्रक्रिया पूरी कराते हैं. इस दौरान कांवरिए यात्रा में अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगने के साथ अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामना की पूर्ति के लिए बाबा बैद्यनाथ से प्रार्थना करते हैं.
नाम, गोत्र और मनोकामना को भगवान के सामने रखने का विधान
पुरोहितों के अनुसार संकल्प को केवल मंत्रोच्चार तक सीमित नहीं माना जाता. धार्मिक दृष्टि से यह श्रद्धालु की पहचान, उद्देश्य और मनोकामना को आराध्य के चरणों में समर्पित करने की प्रक्रिया है. श्रद्धालुओं में भी विश्वास है कि विधि-विधान और संकल्प के साथ की गई पूजा से बाबा बैद्यनाथ उनकी प्रार्थना स्वीकार करते हैं. इसी आस्था के कारण श्रावणी मेले और कांवर यात्रा के दौरान देवघर में संकल्प कराने की परंपरा आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. गंगाजल लेकर पहुंचे शिवभक्त जलाभिषेक से पहले इस धार्मिक विधान को पूरा कर अपनी यात्रा और आराधना को पूर्ण मानते हैं.
रिपोर्ट – प्रशांत कुमार
