देवघर(DEOGHAR) : पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है. यहां विराजमान बाबा बैद्यनाथ को कामना लिंग भी कहा जाता है.मान्यता है कि बाबा भोलेनाथ का गंगाजल और बेलपत्र से जलाभिषेक करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी आस्था के कारण सावन माह में यहां एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों में देखने को नहीं मिलती.
भगवान बैद्यनाथ को अर्पित करते हैं
सावन के प्रत्येक बैद्यनाथ मंदिर परिसर में तीर्थ पुरोहितों द्वारा दुर्लभ प्रजातियों के बेलपत्रों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाती है. इस प्रदर्शनी में दूर-दराज के जंगलों और विभिन्न राज्यों से एकत्र किए गए अनोखे बेलपत्र श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सजाए जाते हैं. पुरोहित इन दुर्लभ बेलपत्रों को चांदी की थालियों में आकर्षक ढंग से सजाकर भगवान बैद्यनाथ को अर्पित करते हैं.
बताया जाता है कि यह परंपरा सदियों पहले संत बमबम बाबा ने शुरू की थी, जिसे आज भी यहां के तीर्थ पुरोहित पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं. पुरोहितों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल भगवान शिव की आराधना ही नहीं, बल्कि समाज में एकता, प्रकृति संरक्षण और धार्मिक संस्कृति का संदेश देना भी है.
धार्मिक महत्ता को देखकर अभिभूत हो जाते हैं
श्रावणी मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस अनोखी बेलपत्र प्रदर्शनी को देखने के लिए मंदिर परिसर पहुंचते हैं. पूरे मंदिर प्रांगण में आठ अलग-अलग स्थानों पर पुरोहितों के आठ दलों द्वारा यह प्रदर्शनी लगाई जाती है. श्रद्धालु दुर्लभ बेलपत्रों की विविधता और उनकी धार्मिक महत्ता को देखकर अभिभूत हो जाते हैं.
बैद्यनाथ धाम की यह विशेष परंपरा सावन की धार्मिक आस्था को और भी भव्य बनाती है.यही कारण है कि यह प्रदर्शनी हर वर्ष श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनती है और देवघर की विशिष्ट पहचान के रूप में देशभर में प्रसिद्ध है.
रिपोर्ट - प्रशांत कुमार
