Jharkhand

हे भोले बाबा जन्मदिन पर रिमोट वाली गाड़ी दिलवा दीजिए इसी कामना के साथ 5 साल का बच्चा कर रहा है सबसे कठिन दंड यात्रा....

Samir Hussain
Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर

देवघर(DEOGHAR): सावन में कांवर यात्रा का महत्व है.इनमें ऐसे भी कांवरिया होते है जो सुल्तानगंज से दंड देते हुए कठिन यात्रा कर बाबाधाम पहुँचते है.डंडी बम के नाम से पहचान रखने वाले ये कांवरिया कोई सनातन धर्म को बढ़ाने की कामना लेकर आते है तो कोई अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर.लेकिन इनसे हटकर 5 वर्ष का बालक है जो रिमोट वाली गाड़ी और साईकल के लिए भोले के दर पर दंड देते हुए बाबाधाम की ओर बढ़ रहा है.लेकिन इसके उत्साह और उमंग में कोई कमी नही दिखाई देती.

5 साल के बालक ने बड़ो बड़ो को पीछे छोड़

झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला 5 वर्षीय बलराम अपने बड़े भाई और दादा दादी के साथ कांवर यात्रा इसी माह की 6 तारीख को सुल्तानगंज से शुरू की.105 किलोमीटर की दूरी तय कर बाबाधाम पहुँचने के लिए जहाँ अन्य कांवरियों को काफी कठिनाई होती है वही यह नन्हा सा मासूम बालक सिर्फ भोलेनाथ से रिमोट वाली गाड़ी और साईकल के लिए हठयोग कर दंड यात्रा कर रहा है.नन्हे नन्हे पाँव को आगे बढ़ाते हुए दंडवत कांवर यात्रा बिना किसी थकावट, चेहरे पर मायूसी के बड़े उत्साह और उमंग के साथ दंडवत करते हुए बाबा बैद्यनाथ के शरण मे पहुँच रहा है.आज अपने 19 दिन की इस यात्रा में बड़ी स्फूर्ति के साथ दंड देते आ रहा है.दरअसल बलराम का जन्मदिन अगले माह 26 तारीख को है और उसका सपना है कि उसके जन्मदिन पर बाबा बैद्यनाथ किसी न किसी तरह उसकी इच्छा पूरी करेंगे.बलराम के साथ चल रहा इसका बड़ा भाई श्याम विद्या प्राप्त करने के लिए कर रहा है.जबकी इसके दादा जी अपने पोते को सनातन धर्म, हिंदू समाज, गौ सेवा और नारी रक्षा के लिए इनको यात्रा करवा रहे है.वही दूसरी ओर एक महिला दंडी अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर पहली बार दंड देते आ रही है.

भोलेदानी सबके के लिए हैं इसलिए कठिन से कठिन यात्रा पूरी और मनोकामना पूर्ण करने वाली होती है

माह भर चलने वाला श्रावणी मेला अब अपने अंतिम पड़ाव पर है.कांवर में गंगा जल भर कर नंगे पांव गंगाघाम से बाबाधाम की कष्टप्रद यात्रा करने की अति प्राचीन परंपरा है.कहते है कि तप से सिद्धि की प्राप्ति होती है.तभी भक्त कठोर तप कर अपने आराध्य बाबा बैद्यनाथ को प्रसन्न करने की कोशिश करते है.कोई कांधे पर कांवर लेकर नंगे पांव बाबा धाम पहुचतें है कोई डाक बम बन कर दौड़़ते हुए जलपात्र लेकर पहुचतें है जबकि कुछ तो एक कदम और आगे बढ़़कर हठयोग का सहारा लेते हुए दंड देते बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते है.इस तरह दंड देते हुए 105 किलामीटर  की कांवर यात्रा लगभग 25 से लेकर 40 दिनों में पूरी होती है.लेकिन बाबा के इन भक्तो की माने तो यह शक्ति उन्हे बाबा की अनुकंपा से मिलती है.आस्था और श्रद्धा से सामर्थ्य का सृजन होता है और यही इन दंडी शिव भक्त कांवरिया को दंड देते हुए जल लेकर बाबाधाम आने की शक्ति प्रदान करता है.दंडी बम भी मानते है की बाबा की अनुकंपा के बगैर यह कठिन यात्रा संभव नही है.

रिपोर्ट: प्रशांत कुमार, देवघर