Jharkhand

सावन में शिवमय हुआ देवघर, 105 KM की कांवर यात्रा में गूंज रहा ‘बोल बम’

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

देवघर (DEOGHAR): सावन का महीना शुरू होते ही बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है. देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. भाषा, क्षेत्र, जाति और आर्थिक स्थिति की अलग-अलग पहचान पीछे छूट जाती है और सभी की एक ही पहचान बन जाती है, शिव भक्त कांवरिया. यही वजह है कि श्रावणी मेले के दौरान देवघर में ‘लघु भारत’ की झलक दिखाई देती है.

105 किलोमीटर की यात्रा में गूंजता है बोल बम 

कांवर यात्रा की शुरुआत बिहार के सुल्तानगंज से होती है, जहां श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान करने के बाद कांवर में पवित्र गंगाजल भरते हैं. इसके बाद बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने का संकल्प लेकर करीब 105 किलोमीटर की यात्रा पर निकल पड़ते हैं. रास्ते भर ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा भरते हैं.कंधों पर रंग-बिरंगी कांवर लेकर कोई पैदल चलता है तो कोई तेज गति से अपनी यात्रा पूरी करने में जुटा रहता है. कठिन रास्ते और लंबी दूरी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं होता.

जाति और आर्थिक भेद से ऊपर शिवभक्ति 

श्रावणी मेले की सबसे खास तस्वीर सामाजिक समानता की दिखाई देती है. यहां न कोई अमीर होता है, न गरीब और न ही ऊंच-नीच का अंतर नजर आता है. अलग-अलग प्रदेशों, भाषाओं और सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले श्रद्धालु एक-दूसरे को ‘बम’ कहकर संबोधित करते हैं. कांवरिया पथ पर दिखाई देने वाला यही भाईचारा इस धार्मिक यात्रा को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक बनाता है.

युवाओं में बढ़ा कांवर यात्रा का आकर्षण 

इस बार कांवर यात्रा में युवाओं की भागीदारी भी खास तौर पर दिखाई दे रही है. बड़ी संख्या में Gen Z युवा बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं. कोई बेहतर शिक्षा और भविष्य की कामना लेकर आया है तो कोई मनोकामना पूरी होने के बाद बाबा के प्रति आभार व्यक्त करने कांवर उठा रहा है. सावन में लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था से देवघर और पूरा कांवरिया मार्ग शिवमय हो जाता है. अलग-अलग पहचान के बावजूद एक साथ आगे बढ़ते कांवरिया यह संदेश देते हैं कि आस्था केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाली शक्ति भी बन सकती है.

रिपोर्ट प्रशांत कुमार