देवघर (DEOGHAR): देवघर में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा असर 298 स्कूली बच्चों के भविष्य पर पड़ता दिखाई दे रहा है. भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में अदालत के आदेश के बाद सोनारायठाढ़ी प्रखंड स्थित करीब 70 वर्ष पुराने राजकीयकृत मध्य विद्यालय, चंदना को सील कर दिया गया. स्कूल बंद होने के साथ ही यहां पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर संकट गहरा गया है.
जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर में बने किचन शेड और अतिरिक्त कक्षों के निर्माण को लेकर रैयत झारी सिंह ने अदालत में याचिका दायर की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी जमाबंदी भूमि पर अवैध निर्माण किया गया है. इस मामले में देवघर के उपायुक्त, सारवां अंचलाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, विद्यालय के प्रधानाध्यापक और विद्यालय प्रबंधन समिति को पक्षकार बनाया गया था. मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने 10 जून 2026 को वादी के पक्ष में फैसला सुनाया. इसके बाद 5 जुलाई को न्यायालय के निर्देश पर मजिस्ट्रेट हेमंत मुर्मू की निगरानी में आठ सदस्यीय टीम ने विद्यालय पहुंचकर उसे सील कर दिया.
विद्यालय बंद होने से कक्षा 1 से 8 तक के 298 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो गई है. सोमवार को कई बच्चे रोज की तरह स्कूल पहुंचे, लेकिन मुख्य द्वार पर ताला लगा देखकर मायूस होकर वापस लौट गए. घटना से नाराज छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की. इस विद्यालय में कुल आठ शिक्षक कार्यरत हैं और यह पिछले लगभग सात दशकों से क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहा था. अब अचानक स्कूल बंद होने से अभिभावकों और छात्रों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है.
जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने स्वीकार किया कि पूर्व में हुई विभागीय लापरवाही का खामियाजा अब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द ही वैकल्पिक विद्यालय की व्यवस्था की जाएगी. साथ ही न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की जाएगी. हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अदालत ने 10 जून को ही फैसला सुना दिया था, तब 5 जुलाई तक संबंधित विभाग ने स्थिति संभालने या कानूनी विकल्प अपनाने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया. इस प्रशासनिक चूक की सबसे बड़ी कीमत अब मासूम स्कूली बच्चों को चुकानी पड़ रही है.
रिपोर्ट : ऋतुराज सिन्हा
